उत्तर प्रदेश में बेचीं जा रही है मिलावटी चीनी

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मेरठ/ नई दिल्ली, 26 अक्टूबर: दीपावली की खरीददारी हर घर में जोरो शोरो से चल रही है। लोगों की भीड़ से बाज़ार गुलज़ार है। एक औऱ जब आप हम दीपावली के जरिए स्नेह, प्यार और हर्षोल्लास से घर परिवार और समाज के लोगों को दीयों की रौशनी से रौशन करने के सपने संजो रहे है वहीं दूसरी और समाज के ही कुछ तत्व ऐसे भी है जो अपना व्यापार बढ़ाने के लिए दीवाली की मिठास को मिलवाट की कडवाहट में बदलने का काम रहे है। मिलावट का ये कारोबार वैसे तो पूरे देश में ही फैला है लेकिन हम बात कर रहे है उत्तर प्रदेश की। उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी गन्ना उत्पादक राज्य के तौर पर जाना जाता है। लेकिन त्योहारों के मौको पर खाद्य पदार्थों में मिलावट की खबरें भी यहां काफी देखने को मिलती है।

सूबे के पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की बम्बर खेती होती है। यहां से देश ही न हीं विदेश में भी चीनी निर्यात की जाती है। लेकिन जब भी कोई बडा त्योंहार आता है तब चीनी जैसे खाद्य पदार्थों में मिलावट का गोरखधंधा यहां जोर पकडने लगता है। ऐसा नहीं है कि मिलावटखोर पकडे नहीं जाते है। बल्कि हकीकत ये है कि पकडे जाने के बाद जल्दी ही छूट जाते है। इन दिनों यहां पर तैयार खोया, मावा, पनीर, दूध और चीनी में मिलवाट की खबरें आम है। मिलावट खोरों का एक बड़ा गिरोह है जो त्योंहार पर मिठाई बनाने वाले व्यापारियों से सांठगांठ कर क्विंटलों में मिलावटी चीनी बेचकर आम जनता की सेहत से खिलवाड करता है।

इसी तरह की खबरें इन दिनों पश्चिमी यूपी के मेरठ और मुज़फ़्फ़रनगर और सामली में भी सुनने को मिल रही है। खबर की पड़ताल के लिए हमारी टीम ने की मिलावटी चीनी के गोरखघंधे की पड़ताल के लिए मेरठ का दौरा किया। मेरठ पहुँचने के बाद पता चला यहाँ मिलावटखोर चीनी में चॉक पाउडर और प्लास्टिक क्रिस्टल व अन्य सामग्री मिलाकर नकली चीनी को बेचने साजिश कर रहे है। हालांकि खाद्य एवं रसद विभाग की टीम और स्वास्थ्य महकमे की टीम लगातार मिठाई और चीनी स्टॉक की जांच कर रहे है लेकिन चोरी छिपे ये गोरखधंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा।

खाद्य अपमिश्रण विभाग मेरठ के मुख्य खाद्य निरीक्षक अक्षय गोयल का कहना है कि ग़ैरक़ानूनी काम करने वालों के ख़िलाफ़ हमारी टीम लगातार छापामारी कर रही है। तक़रीबन हर दुकान से सैंपल जाँच के लिेए हमने लिए हैं। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है। आधे से ज्यादा सैंपल जांच में फेल पाए जा रहे है। गोयल ने कहा कि सेंपल छोटी दुकान के ही फेल नहीं हुए बल्कि कई बड़ी दुकानों के भी मानक पर खरे नहीं उतरे है। बीते पाँच सालों में खाद्य पदार्थों के मानक पूरे न करने वाली दुकानों के तक़रीबन दो करोड़ रुपये से अधिक के चालान काटे जा चुके है।

मुख्य खाद्य निरीक्षक अक्षय गोयल ने कहा कि मिलावटखोर चीनी में प्लास्टिक के क्रिस्टल मिला कर बेच रहे है। ये इसलिए कर रहे हैं ताकि चीनी का वजन बढ़ जाए। गोयल ने कहा कि ये क्रिस्टल एकदम चीनी की तरह ही होते हैं और चीनी की तरह चमकीले होते है। इनकी रेट काफ़ी कम होती है इसलिए इनको चीनी में मिलाकर व्यापारी बेच रहे हैं। इन क्रिस्टल में एवं चीनी के दानों में भेद करना मुश्किल होता है। क्योंकि ये क्रिस्टल भी चीनी की तरह गर्मी में पिघल जाते हैं। गर्म दूध में भी ये आसानी से पिघल जाते है। चाय या दूध में इनका सहज ही पता नहीं लग पाता है। दूध या चाय के ठंडे होने पर ये मलाई की तरह दूध पर परत जमा लेते हैं। इसके अलावा कुछ लोग चीनी में चॉक पाउडर भी मिला रहे हैं ताकि चीनी का वजन बढ़ जाए।

दिल्ली के लेडी इरविन हॉस्पिटल के डॉ बीएल चौधरी ने बताया कि चीनी में किसी भी तरह की मिलावट स्वास्थ्य के लिए घातक है। अगर चॉक पाउडर मिलाकर चीनी बेची जा रही है तो वो शरीर के लिए नुक़सानदायक है। इससे कई तरह की बिमारियों के होने की संभावना रहती है। इसी तरह से अगर चीनी में प्लास्टिक क्रिस्टल मिलाकर बेची जा रही है तो ये इन्सान के लिए बेहद चिन्तनीय है। इस तरह की मिलावटी चीनी खाने से केंसर जैसी बीमारियों की संभावनाएँ बनी रहती है।

मेरठ के ज़िलाधिकारी अनिल धींगरा ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। लगातार छापामारी की जा रही है । जॉंच के लिए गए सैंपलों को लैब में भेज दिया गया है। दोषियों को बख्शा नहीं। जाएगा। ज़िलाधिकारी ने कहा कि अगर आपको कहीं मिलावटखोरों का पता चलता है तो इसकी की शिकायत आप खाद्य विभाग में कर सकते हैं।इसके अलावा उपभोक्ता विभाग में भी कर सकते हैं। शिकायत के लिए कोई वकील करने की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा आप लखनऊ स्थित खाद्य सुरक्षा एवं ड्रग प्रशासन के टोल फ़्री नम्बर 18001805553 नम्बर पर शिकायत भी कर सकते है।

मिलावटी चीनी की घर पर करें पहचान
दिल्ली स्थित एलएनजेपी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एमएन बासना ने कहा कि अगर आपको लगता है कि जो चीनी आप ख़रीदे है उस चीनी में मिलावट है तो आप स्वयं भी इसकी जाँच कर सकते है। आप एक गिलास में पानी डालें और उसमें एक चम्मच चीनी डालें। अगर चीनी पूरी तरह पानी मैं नीचे बैठ जाए तो समझें शुद्द है और अगर उप्र तैरने लगे तो उसमें मिलावट की गयी है। क्योंकि क्रिस्टल होंगे तो वो पानी में तैरने लगेंगे। डॉ मीणा ने कहा कि साफ़ चीनी में कम मिलावट होती है लेकिन जो चीनी धुंधली होती है उसमें मिलावट की आशंका रहती है।

मैक्स हॉस्पिटल के डॉ कहा कि डॉ संदीप जैन ने कहा कि प्लास्टिक के क्रिस्टल में पॉली इथाईलीन रसायन होता है। नुकसानदायी होता है। मिलावटी चीनी खाने के दौरान आँतों में चिपक जाती है। इससे कैन्सर का ख़तरा होने की संभावना रहती है। तरह की चीनी खाने से आँतों को नुक़सान पहुँचता है और कई तरह की लाइलाज बीमारियाँ होने की संभावना बनी रहती है।

मिलावटखोरों के खिलाफ सरकार तो लगातार चैकिंग अभियान चला ही रही है समाज की भी ये ज़िम्मेदारी है कि ऐसे लोगों की शिकायत कर उन्हें बेनक़ाब करें ताकि अपने आर्थिक लाभ के चक्कर में आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।

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