कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से चीनी उद्योग पर भी असर

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कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से चीनी उद्योग पर भी असर पड़ते हुए नजर आ रहा है। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के कारण चीनी निर्यात में बाधा आई है, और अब ब्राजील इथेनॉल उत्पादन से ज्यादा चीनी उत्पादन की ओर रुख कर रहा है। परिणामस्वरूप, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी ज्यादा होगी, जिससे चीनी के कीमतों पर असर पड़ेगा।

दुनिया भर के देशों ने लॉकडाउन की घोषणा शुरू करने के बाद मार्च में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू यातायात में ठहराव आ गया है। इससे पेट्रोल और डीजल की मांग में भारी गिरावट आई है। कच्चे तेल में गिरावट को देखते हुए, ब्राजील, जिसे दुनिया में चीनी-इथेनॉल के बड़े निर्यातक के रूप में जाना जाता है, उसने अपने नीति में परिवर्तन कर गन्ने के रस से इथेनॉल के बजाय चीनी उत्पादों को बढ़ावा देने का फैसला किया। चीनी उत्पादन में ब्राजील द्वारा वृद्धि अंतर्राष्ट्रीय बाजार को प्रभावित करेगा। आपको बता दे, जब जब तेल की कीमतें अच्छी रहती है तब ब्राजील ज्यादा फायदे के लिए इथेनॉल उत्पादन पर जोर देता है।

भारत में घरेलू इस्तेमाल के लिए चीनी की बिक्री होती है, और मिठाइयों, फार्मास्यूटिकल्स और पेय पदार्थों में भी चीनी का बडी मात्रा में उपयोग किया जाता है। वर्तमान में, लॉकडाऊन के कारण ये सभी उद्योग भी बंद हैं।

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