पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान अब गन्ने की जगह उगा रहे है केले

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मेरठ: केले में भरपूर कमाई को देखते हुए पश्चिमी यूपी के खेतों में गन्ना किसान अब केले उगाने लगे हैं। इस क्षेत्र के गन्ना किसानों ने गत दो वर्षों से फलों की फसल उगानी शुरू कर दी है। टिशू कल्चर तकनीक द्वारा विकसित एक विशेष किस्म के केले के पौधे ने उनका दिल जीत लिया है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय (SVBPAU) के कृषि जैव प्रौद्योगिकी के प्रोफेसर आरएस सेंगर ने कहा कि केले के बागान में लाभ अब गन्ने की तुलना में दोगुना है। यह रोग मुक्त भी है। उन्होंने कहा कि उप्र के किसान इस ओर लाभ कमाने के लिए प्रेरित हुए हैं। जल्द ही पूरे क्षेत्र में फल की फसल और केले उगाए जाएंगे क्योंकि इनकी मांग भी अधिक है और ये फायदेमंद भी हैं।

फिलहाल मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और बिजनौर में 250 हेक्टेयर में केले की खेती की जा रही है।

कृषि विश्वविद्यालय ने टिशू कल्चर तकनीक से ग्रैंड नाइन (जी 9) नामक विशेष किस्म के रोग मुक्त केले के पौधे विकसित किए हैं। इसे पारंपरिक तरीकों के सामने विकसित होने में कम समय लगता है। इसकी विविधता ने किसानों को कार्बोहाइड्रेट से भरपूर फल बोने के लिए प्रेरित किया जो गन्ने की तुलना में आय से दोगुना से अधिक पैदावार देता है।

सेंगर ने कहा की महाराष्ट्र दशकों से केले के उत्पादन में है। यहां के केले पूरे देश में भेजे जाते हैं। उप्र के महाराजगंज, लखनऊ और सीतापुर जैसे कुछ पूर्वी यूपी जिलों में भी बड़े पैमाने पर केले का वृक्षारोपण हुआ है। पश्चिमी यूपी के किसानों के बीच गन्ना पसंदीदा रहा। लेकिन अब वे पिछले दो वर्षों से केला क्षेत्र में प्रवेश कर रहे है।

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