आधुनिक तरीकों से सांगली, कोल्हापुर में गन्ने की पैदावार को मिला बढ़ावा

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कोल्हापुर: कोल्हापुर और सांगली जिलों में गन्ना किसानों को ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीक का लाभ मिल रहा है। ड्रिप सिंचाई से मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए पानी की बचत भी होती है। पिछले कुछ वर्षों में, किसान प्रति एकड़ 100 टन से अधिक गन्ना उगा रहे हैं और वे अब प्रति एकड़ 150-200 टन के लक्ष्य की ओर चल रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक, सांगली जिले के इस्लामपुर के किसान अशोक खोत, जो सात एकड़ जमीन के मालिक हैं, उन्होंने तीन साल पहले 167 टन गन्ने का लक्ष्य रखा था और इसे हासिल किया। उन्होंने इनवर्टेड छिड़काव सिंचाई पद्धति का सफलतापूर्वक प्रयोग किया, जिसका पालन अब अन्य किसान कर रहे हैं। खोत ने अब प्रति एकड़ 200 टन गन्ने का लक्ष्य बनाया है। कई किसानों ने उच्च उत्पादकता की तकनीक सीख ली है। वे अब परीक्षण के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता के बारे में डेटा से अच्छी तरह से सुसज्जित हैं। मुझे साल में दो बार मिट्टी की जांच करवानी पड़ती है और उसी के अनुसार पोषण मिलता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि, गन्ने की खेती के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। हालांकि, किसानों ने अब ड्रिप सिंचाई पद्धति को अपनाया है और पैदावार बढ़ाते हुए पानी की बचत कर रहे हैं। खोत ने कहा कि उन्होंने मॉड्यूलर इनवर्टड ड्रिप इरिगेशन विकसित किया है, जिसके साथ वह अब तक 200 टन प्रति एकड़ की उच्चतम उपज की उम्मीद कर रहे हैं। सांगली जिले के येडेनिपानी गाँव के अमर पाटिल ने भी ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल शुरू किया है। उन्हें अब प्रति एकड़ 130 टन गन्ना मिल रहा है। सांगली के जिला कृषि अधीक्षक बसवराज मस्तोली ने कहा कि, पश्चिमी महाराष्ट्र के गन्ना बेल्ट के अन्य जिलों की तुलना में, सांगली और कोल्हापुर में पिछले कुछ वर्षों में गन्ना पैदावार में भारी वृद्धि हुई है।

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