गन्ना किसानों को ओवर डेट पर्ची जमा करने हेतु समितियों के चक्कर लगाने से मुक्ति

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लखनऊ: प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गन्ना किसानों को गन्ना आपूर्ति में हर संभव सुविधा प्रदत्त करने हेतु दिए गए आदेशों के क्रम में मा. मंत्री गन्ना एवं चीनी उद्योग श्री सुरेश राणा द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में प्रदेश के आयुक्त, गन्ना एवं चीनी श्री संजय आर. भूसरेड्डी ने बताया कि किसानों को हायल पर्ची (ओवर डेट) को जमा करने हेतु गन्ना समितियों के चक्कर न लगाने पड़ें इसके लिए ई.आर.पी. में व्यवस्था की गई है कि किसान यदि उसकी जारी पर्ची को शादी-विवाह, खेत में पानी भरा होने या अन्य किसी कारण से निर्धारित अवधि के अंदर नहीं तुलवा पाता है तो किसान की वह पर्ची आगामी तिथियों के इंडेण्ट में स्वतः ही Revalidate होकर पुनः उसके पास S.M.S. पर्ची के रूप में पहुंच जाएगी।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पूर्व में हायल पर्ची जमा कराने के लिए किसानों को समितियों के चक्कर लगाने पड़ते थे तथा उसकी हायल पर्ची समिति में जमा कराने के बाद केवल एक बार ही रिवैलिडेट (पुनः दिनांकित) होकर किसान को प्राप्त होती थी परंतु इस वर्ष किसानों को सुविधा प्रदान करने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि हायल पर्ची को तुलवाने हेतु किसान को दो बार मौका दिया जाएगा। किसी भी तरह से पर्ची हायल होने पर आगामी तिथियों के इंडेण्ट में ई.आर.पी. के माध्यम से स्वतः ही पुनः पर्ची जारी हो जाएगी, यदि किसान फिर भी गन्ना नहीं तुलवा पाता है तो पर्ची पुनः आगामी तिथियों के इंडेण्ट में दोबारा कृषक को जारी की जाएगी, जारी की जाने वाली पर्ची का क्रमांक वही होगा जिस क्रमांक पर वह पर्ची प्रथम बार जारी की गई थी, जिससे पर्ची किसी भी दशा में दो बार न तौली जा सके। हायल पर्ची दोबारा जारी होने पर S.M.S. पर्ची में अन्तिम अक्षर के रूप में ‘H’ दर्ज होगा, जिसमें किसान यह जान जायेंगे कि उनकी हायल पर्ची दोबारा जारी हो गयी है।

श्री भूसरेड्डी ने यह भी बताया कि इससे कोरोना काल में किसानों को अनावश्यक समितियों एवं दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे तथा किसान को घर बैठे ही हायल पर्ची रिवैलिडेट होकर उसके मोबाइल नंबर पर S.M.S. पर्ची के प्राप्त होने का अवसर दो बार दिया जाएगा ताकि किसान अपने गन्ने को सुविधानुसार तुलवा सके तथा उसकी कोई पर्ची भी बेकार न जाये। इससे कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने में भी सहायता मिलेगी तथा किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने में होने वाले समय एवं धन की भी बचत होगी।

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