महाराष्ट्र: बाढ़ और सूखे ने इथेनॉल उत्पादन की योजना को बिगाड़ा…

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पुणे : चीनी मंडी

हाल ही में महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ और भयंकर सूखे ने राज्य के चीनी मिलों को इथेनॉल उत्पादन की योजना में रूकावट पैदा की है। महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ फेडरेशन ने हाल ही में केंद्र से मौजूदा चीनी अधिशेष को इथेनॉल में बदलने के लिए अनुमति मांगी थी, और साथ ही “सी” हैवी मोलासेस, “बी” हैवी मोलासेस और जूस के रूप में इथनॉल उत्पादन की भी योजना है। महासंघ के अध्यक्ष जयप्रकाश डांडेगांवकर ने कहा कि, यद्यपि प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है, सरकार द्वारा घोषित दरों और चीनी स्टॉक को इथेनॉल में बदलने के लिए उत्पादन लागत में एक बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि, चीनी को इथेनॉल में परिवर्तित करने के लिए सरकार ने 59 रुपये प्रति लीटर की दर घोषित की है और उत्पादन की लागत 64 रुपये प्रति लीटर है, जिसका अर्थ है 5 रुपये प्रति लीटर का नुकसान, जो व्यवहार्य नहीं है।

तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल के साथ सम्मिश्रण के लिए 2019-20 (दिसंबर-नवंबर) के दौरान चीनी मिलों से लगभग 511 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने की योजना बनाई है। महाराष्ट्र आमतौर पर लगभग 110 करोड़ लीटर की आपूर्ति करता है। पिछले चार सत्रों में चीनी मिलों के वित्तीय संकट को देखते हुए, हालांकि कई मिलों ने विस्तार और आधुनिकीकरण की योजनाएं बनाई हैं, कई मिलें एनपीए में है, जिसके कारण बैंक लोन देने को तैयार नहीं हैं। अब, एफआरपी भुगतान पर लगाए गए ब्याज के बोझ के कारण , बहुत कम मिलें निवेश करने में सक्षम होंगे। इस सीज़न में, तेल विपणन कंपनियों ने 511 करोड़ लीटर की निविदाएँ निकाली है, जिसमें महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 72.45 करोड़ लीटर है। इसके अलावा, हाल ही में आई बाढ़ को देखते हुए, राज्य में प्रमुख गन्ना बेल्ट सातारा, सांगली और कोल्हापुर में, और मराठवाड़ा क्षेत्र में सूखे की वजह से चीनी उत्पादन में कमी आने की उम्मीद है। इसलिए इथेनॉल की आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना है।

बाढ के कारण कोल्हापुर और सांगली जिले में हजारो एकड गन्‍ना फसल बर्बाद हो चुकी है। और साथ ही साथ मराठवाडा, विदर्भ के कई जिलों में चारे की कमी से पशुओं के चारे के लिए गन्ना बेचा गया, इसके चलते चीनी उत्पादन पर असर पड़ेगा। चीनी उद्योग के अनुमान अनुसार, महाराष्ट्र में सीजन 2019-2020 में 65 लाख टन चीनी उत्पादन होने की उम्मीद है। मिलर्स सरकार द्वारा घोषित उत्पादन और दरों की लागत में समानता चाहते हैं और इथेनॉल कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अधिक मिलों को सक्षम करने के लिए 10 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी भी चाहते है।

राज्य के गन्ना क्षेत्र से पहचाने जाने वाले कोल्हापुर और सांगली जिलों में उत्पादन बहुत कम होने की संभावना है, जिससे चीनी सीजन में मिलों को पेराई के लिए बहुत ही कम गन्ना उपलब्ध हो सकता है। सांगली और कोल्हापुर जिलों के साथ-साथ मराठवाड़ा में चीनी मिलों को क्रशिंग में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सूखे के कारण, मराठवाड़ा में कई मिलों द्वारा पूरी क्षमता से क्रशिंग सीजन पूरा होने की संभावना नहीं है। नतीजतन, 2019-20 के दौरान इथेनॉल की आपूर्ति में भारी समस्या पैदा करने के लिए मोलासेस की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित होगी।

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