सरकार द्वारा चीनी के लिए ‘दोहरी मूल्य व्यवस्था’ लागू करने पर विचार…

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नई दिल्ली: अधिशेष चीनी और चीनी की कीमतों ने हमेशा से भारतीय चीनी उद्योग के सामने कई समस्याएं पैदा की है। जिसके चलते समय-समय पर सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP), सॉफ्ट लोन के प्रावधान और निर्यात के लिए सब्सिडी जैसे कई उपाय करती रही है। और इसके चलते मिलों को कुछ हदतक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा ताकद मिलती रही है। लेकिन अब सरकार और एक महत्वपूर्ण कदम उठा सकती है। गन्ना किसान की आय बढ़ाने और चीनी मिलों के नकदी प्रवाह में सुधार करने के लिए, चीनी उद्योग के लिए दोहरी मूल्य व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है। खबरों के मुताबिक, चीनी की दो अलग-अलग दरें होंगी, एक औद्योगिक उपयोगकर्ताओं के लिए और एक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए होगी। औद्योगिक उपयोगकर्ताओं के लिए बेची जानेवाली चीनी की कीमत घरेलू उपयोगकर्ताओं की तुलना में अधिक होगी।

उद्योग के विभिन्न विशेषज्ञों ने पहले कहा था कि, केंद्र सरकार को चीनी के लिए उत्पादन और उपलब्धता की लागत के आधार पर दोहरी कीमत की नीति पर विचार करना चाहिए। चीनी की खपत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए केवल 30 से 35 प्रतिशत है, जबकि शेष 65 से 70 प्रतिशत का उपयोग बल्क, पेय पदार्थ, मिठाई निर्माताओं, कन्फेक्शनरी जैसे थोक उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है। थोक उपभोक्ता चीनी से भारी मुनाफा कमाते हैं, इसलिए उन्हें ज्यादा दरों से चीनी की बिक्री करने पर सरकार गंभीरता से सोचविचार कर रही है।

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