सरकार की चिनी उद्योग को बढती मदद

2016-17 के चीनी सीझन के अनुसार, 493 चीनी मिलों की 34 लाख मीट्रिक टन की कुल चीनी उत्पादन क्षमता हैं। जिसमे अधिकांश उत्पादन उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों से है। चीनी की कुल क्षमता में से घरेलू मांग को पूरा करने के लिए लगभग 89 प्रतिशत का उपयोग किया जाता है। वैश्विक प्रति व्यक्ति खपत 23 किलोग्राम के औसत की तुलना में 18.8 किलोग्राम है।
 
नई दिल्ली : चीनी मंडी 
भारत सरकार अगले साल चीन में 2 मिलियन कच्ची चीनी का निर्यात करने की योजना बना रही है। यह निर्यात बांग्लादेश जैसे अधिक आयात करने वाले देशों से बाजार हिस्सेदारी हासिल करने में सक्षम करेगी, जिसे कच्ची चीनी की प्रति वर्ष 2.5-3 मीट्रिक टन की आवश्यकता होती है। भारत विपणन वर्ष (MY) 2017-18 (अक्टूबर-सितंबर) में 32.5 मिलियन टन के वार्षिक उत्पादन के साथ चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बना है। चीनी उद्योग के साथ भारत भर में लगभग 5 करोड़ किसान जुड़े है और इसलिए गन्ना फसल राजकीय गलियारों में भी बड़ा महत्व रखती है। इसके चलते चीनी उद्योग की ‘नकदी’ मदद के लिए सरकारद्वारा हर मुमकिन प्रयास किये जा रहे है ।
चीनी उद्योग के सामने अतिरिक्त आपूर्ती की गंभीर समस्या …
मजबूत पृष्ठभूमि के बावजूद, बाजार में चीनी की अतिरिक्त आपूर्ति ने इस क्षेत्र को दबाव में रखा है और इसकी वित्तीय  स्थिती कमजोर कर दी है। अधिशेष चीनी  ने औसत बिक्री मूल्य कम कर दिया है, और नतीजतन उद्योग प्रतिभागियों ने अपनी चीनी बेचने में देरी जारी रखी है। इसके अलावा, गन्ने की कीमत, जिसे सरकार द्वारा अनिवार्य किया गया है और  2010-11 से 2016-17 की अवधि के दौरान 10 प्रतिशत के साथ एक बड़ी छलांग लगाई  है।  2017-18 के लिए, सरकार ने गन्ने की कीमत में 255 रुपये की बढ़ोतरी की। बढ़ती गन्ने की कीमत उत्पादन की लागत में वृद्धि करती है, लेकिन चीनी की कीमतें गति नहीं रख रही हैं। चीनी उद्योग के लिए उत्पादन की बढ़ती लागत ने ‘ईबीआईटीडीए’ मार्जिन और लाभप्रदता पर एक बड़ा प्रभाव डाला है । उद्योग की मार्जिन और लाभप्रदता की गणना करने के लिए, शीर्ष तीन चीनी फर्मों को ध्यान में रखा गया है।
वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार के लिए सरकारी हस्तक्षेप…
हाल ही में, भारत सरकार ने अधिशेष चीनी को समाप्त करने और नकद के जुंज़ रहे चीनी उद्योग को सहायता देने के लिए कुछ योजनाएं पेश कीं। सरकार ने चीनी मिलों के लिए 2018-19 में 5 लाख मीट्रिक टन निर्यात करने के लिए अनिवार्य बना दिया। यह बंदरगाहों से 100 कि.मी. के भीतर स्थित मिलों को 1000 रूपये प्रति टन की परिवहन सब्सिडी, तटीय राज्यों में बंदरगाह से 100 कि.मी. से अधिक मिलों के लिए 2,500 रूपये  और गैर-तटीय इलाकों में स्थित मिलों के लिए 3,000 रूपये  की परिवहन सब्सिडी की पेशकश की है ।
इसके अलावा, सरकार ने चीनी पर आयात शुल्क को 100 प्रतिशत तक दोगुना कर दिया है और 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क को कम कर दिया है। इसने एक वित्तीय पैकेज की घोषणा की जिसमें 2018-19 के लिए 13.88 / क्विंटल गन्ना की उत्पादन सहायता शामिल है, जो कि इस साल 5.50 / क्विंटल से चीनी मिलों को गन्ना किसानों को उनकी देनदारियों को चुकाने में मदद करेगी ।
सरकार ने जैव ईंधन के लिए बनाई राष्ट्रीय नीति…
मई में, सरकार ने जैव ईंधन के लिए राष्ट्रीय नीति के हिस्से के रूप में पेट्रोल के साथ इथेनॉल के 10 प्रतिशत मिश्रण को लक्षित किया है । सितंबर में, इसने इथेनॉल की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की, जिससे उद्योग को बहुत जरूरी प्रोत्साहन दिया गया। गन्ना इथेनॉल एक अल्कोहल आधारित ईंधन है जो गन्ना के रस और गुड़ के किण्वन द्वारा उत्पादित होता है।
उपर्युक्त सुधारों के अलावा, सरकार अगले वर्ष चीन में 2 मिलियन टन कच्ची चीनी का निर्यात करने की योजना बना रही है। यह निर्यात पु बांग्लादेश जैसे अधिक चीनी आयात करने वाले देशों से बाजार हिस्सेदारी हासिल करने में सक्षम करेगी, जिसमें कच्चे चीनी (वर्तमान में ब्राजील से आयात) प्रति वर्ष 2.5-3 मीट्रिक टन की आवश्यकता होती है। यह भारत को व्यापार घाटे को कम करने में भी मदद करेगा।

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