गन्ने से एथनॉल बनाने के लिए सरकार चीनी मिलों को दे रही है सस्ती दर पर ऋण

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नयी दिल्ली, 24 जुलाई: केन्द्र सरकार देश में पेट्रोल की बढ़ती खपत और क़ीमतों में इज़ाफ़ा की समस्या से निजात पाने के साथ चीनी मिलों को वित्तीय मज़बूती प्रदान कराने के लिए गन्ने के रस व शीरे से एथनॉल बनाने के अभिनव प्रयास कर रही है। इसके लिये आसान दर पर वित्तीय ऋण दिलाने का काम किया जा रहा है। केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने अपने आवास पर मीडिया से बात करके हुए कहा कि वर्तमान में सरकार पैट्रोल के साथ इथेनॉल मिलाने का अनुपात दोगुना करने की ओर अग्रसर है जिसमें सफलता भी मिल रही है।

पैट्रोलियम मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा चीनी मिलों को सस्ती दर पर लोन देने की पहल के बाद चीनी मिलों ने एथनॉल उत्पादन बढ़ाया है। मंत्री ने कहा कि चीनी मिलों का कारोबार करोड़ों रुपयों का है इसमें आधारभूत संरचना विकास के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण सुधार किए है। प्रधान ने कहा कि पैट्रोल के साथ एथनॉल मिश्रित करने का अनुपात 2018-19 सत्र में तक़रीबन आठ प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है। सरकार ऐथेनॉल उत्पादन से चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मे सुधार के साथ ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्द है और इसी दिशा में नीतिगत निर्णय लिए गए है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इथनॉल क्षमता बनाने के लिए चीनी मिलों को आसान ब्याज दर पर ऋण सुविधा प्रदान कराने के साथ ऋण पर ब्याज की मदद के लिए 1332 करोड़ रुपये की ब्याज सहायता देने की पहल की है। इसमें शीरे से अल्कोहल बनाने वाली इकाइयों को भी अलग से मदद दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि 2014 में हमारी सरकार बनने के बाद हमने इथेनॉल के लिए एक निश्चित मूल्य निर्धारित किया था जिसके चलते बीते पाँच सालों में इथेनॉल की आपूर्ति बढ़ी है। आज परिणाम आपके सामने आ रहे है। सरकार की इस पहल से चीनी मिलों को आर्थिक लाभ हो रहा है, वहीं गन्ना किसानों की भी आमदनी बढ़ी है।

मंत्री ने कहा कि सरकार ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पेट्रोल उत्पादों के आयात पर हर साल तक़रीबन 10 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा खर्च करती है। इसे कम करने में भविष्य में एथनॉल का विकल्प न केवल मील का पत्थर साबित होगा बल्कि देश के राजस्व में भी बढ़ोत्तरी होगी।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार गन्ना किसानों और चीनी मिलों की समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए काम कर रही है, भविष्य में चीनी मिलों और किसान संगंठनो द्वारा मिलने वाले सुझावों पर अमल कर स्थाई नीति के तहत कार्य किया जाएगा ताकि गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर बकाया ना रहे और चीनी मिलों को सरकार से किसी भी तरह की वित्तीय मदद की दरकार ना रहे।

पैट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि सरकार किसानों की आमदनी को दो गुना करने के लिए कृत संकल्पित है और ये तब ही संभव है जब चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति में सुधार कर उन्हें आय उपार्जन के लिए वित्तीय स्तर पर मज़बूती दी जाए।

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