उत्तर प्रदेश सरकार ने चीनी मिलों से CSR खर्च योजना का ब्यौरा मांगा

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लखनऊ: अगले पेराई सत्र के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की चीनी मिलों के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) खर्च योजना का ब्यौरा मांगा है।

यूपी गन्ना और चीनी उद्योग के प्रमुख सचिव संजय भूसरेड्डी ने गन्ना मूल्य श्रृंखला से जुड़ी सभी चीनी मिलों और अन्य कंपनियों / एजेंसियों को अपनी सीएसआर गतिविधियों की एक ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। चीनी मिलों के प्रतिनिधियों के साथ यहां हुई एक बैठक में भूसरेड्डी ने मिलर्स को याद दिलाया कि कंपनी अधिनियम 2013 के तहत चीनी मिलों को 500 करोड़ रुपये का नेटवर्थ, 1,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर या 5 करोड़ रुपये से अधिक के शुद्ध लाभ वाली कंपनियों को तीन साल तक औसत शुद्ध लाभ का 2 प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों के लिए खर्च करना अनिवार्य किया गया है।

चीनी मिलों के अलावा, IFFCO, KRIBHCO, FMC कॉर्पोरेशन आदि जैसे कृषि रासायनिक संगठनों को भी राज्य के गन्ना किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की बेहतरी के उद्देश्य से इन सीएसआर गतिविधियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

उन्होंने कहा कि कुछ गांवों को बुनियादी ढांचे की सख्त जरूरत है। श्री भूसरेड्डी ने कहा कि मिलों और अन्य एजेंसियों द्वारा अनिवार्य सीएसआर खर्च के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता थी।

उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार समय-समय पर सभी सीएसआर गतिविधियों की समीक्षा करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे गन्ना क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप हैं या नहीं।

वर्ष 2018-19 सीजन में कुल 33,048 करोड़ रुपये के भुगतान बकाये में से फिलहाल लगभग 4,500 करोड़ रुपये बकाया शेष है। इनमें से निजी क्षेत्र की मिलों के लगभग 4,200 करोड़ रुपये है। सरकारी मिलों का बकाया 300 करोड़ रुपये है। राज्य ने 9 चीनी मिलों के खिलाफ पुलिस मामले दर्ज किए थे, जिनमें बजाज हिंदुस्तान, मोदी और वेव ग्रुप द्वारा संचालित बकाया शामिल थे। एफआईआर आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) 1955 और धारा 420 और 120 (बी) भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कठोर धारा 3/7 के तहत दर्ज की गई थी।

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