खराब पडी चीनी मिलों को वित्तीय मदद देकर किया जाएगा फिर से तैयार

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नई दिल्ली, 1 जून : उत्तर प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने कहा है कि सूबे की सरकार गन्ना किसान और चीनी उद्योग का विकास कर युवाओं को रोजगार दिलाने पर गंभीर है। यही वजह रही कि लोकसभा चुनावों के बाद राज्य मंत्रीपरिषद की पहली अहम बैठक में ही किसानों के हित में सूबे की सरकार ने कई अहम फैसले लिए। दिल्ली में प्रवास के दौरान मीडिया से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रदेश में गन्नाआपूर्ति, बिक्री और खरीद के प्रकिया को अनुकूल बनाने के लिए उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति-विनियमन एवं क्रय अधिनियम, 1953 की धारा-18 में संशोधन किये जाने की कैबीनेट ने मंजूरी दी है इससे गन्ना किसानों को लाभ होगा। मंत्री ने कहा कि कैबिनेट द्वारा गन्ना किसानों और चीनी मिलों की स्थिति को ध्यान में रखकर ही इस संशोधन को मंजूरी दी गयी है। ये संशोधन गन्ना किसानों और कारोबारियों के प्रति सच्ची सोच को दर्शाता है। मंत्री ने कहा कि हमने प्रदेश की जनता से जो वादा किया था उसे पूरा करने की दिशा में हम अग्रसर है। इसी क्रम में गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन कोष के लिये कॉर्पस फण्ड के प्रकरण को अनुमोदित किया गया है।

मंत्री राणा ने कहा कि मंत्रिपरिषद द्वारा रमाला सहकारी चीनी के संदर्भ में लिया गया फैसला बताता है कि सरकार प्रदेश में चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति में सुधार करके चीनी मिलों के विस्तार कार्यक्रम को बढ़ावा दे रही है। मंत्री ने कहा कि काफी दिनों से चर्चा थी कि राज्य में कुछ चीनी मिलें आर्थिक तंगी से जूझ रही है। सरकार ने तुरंत इसका संज्ञान लिया औऱ इसी के तहत अब रमाला सहकारी चीनी मिल का 100 फीसद वित्तपोषण सरकार करेगी। मंत्री ने कहा कि पूर्व में इस मिल का संचालन 50 प्रतिशत राज्य सरकार के अनुदान और 50 फीसद बाहर से कर्ज लेकर होता था लेकिन अब सम्पूर्ण वित्तीय जिम्मेदारी सरकार की होगी। मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सूबे में खराब पडी चीनी मिलों का सर्वे करके उन्हे वित्तीय मदद देकर फिर से चालू करने का काम करेगी।

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