बेमौसमी बारिश से गन्ने की फसल को हुए नुकसान का सरकार कराएगी आंकलन; मिलेगा मुआवजा

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जयपुर,10 मार्च: पश्चिमी विक्षोभ के कारण राजस्थान मे कई जिलों में आयी बेमौसमी बारिश और तेज हवाओं के साथ ओले गिरने से प्रदेश के सीकर, झून्झुनू ,धोलपुर, अजमेर, जालोर, जयपुर और नागौर जिलों में ओला वृष्टि हुई है। यहां पर गेंहूं, जौ और अन्य फसलें ज्यादा प्रभावित हुई है वहीं श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बूंदी और चित्तौड़गढ़ में गन्ने की पकी हुई फसल को काफी नुक़सान हुआ है। तूफानी तेज हवाओ के साथ श्रीगंगानगर में ‘7.8’ मिलि मीटर हनुमानगढ़ में 8 मिलि मीटर और बूंदी में 8.2 मिमि मीटर बारिश हुई है, जबकि चित्तौड़गढ़ में 7.5 मिमि मीटर बारिश के बीच तेज हवा के साथ ओले पडने से गन्ने की फसल को काफी नुकसान हुआ है। नुकसान का ज्यादा असर हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में हुआ है। गन्ने की बुआई देरी से होने के कारण फसल की कटाई देरी से हुई ऐसे में आफत बनकर आयी बारिश से गन्ने की पकी हुई फसल को खराब कर दिया है। गन्ना किसानों के लिए विपदा बनकर आयी इस समस्या से गन्ने कि खडी फसल गिरने से नुकसान होने कि आशंका है।

राजस्थान किसान संघर्ष समिति के संयोजक रणजीत सिंह ने बताया कि अभी हमारे यहां गन्ना पैराई का काम चल रहा है। कई किसानों के खेतों में गन्ने की बुआई देरी से हुई थी इसलिए गन्ना पकने में देरी हुई। हमारे यहां अभी गन्ने की कटाई चल रही है लेकिन भारी बारिश ने फसल को तबाह कर दिया। स्थानीय किसान मंगलाराम ने कहा कि पछेती गन्ने की किस्म की कटाई का सीजन चल रहा है। गन्ने की कटाई कर किसान भाई चीनी मिल में गन्ना ले जा रहे है। अभी भी मिल के बाहर हमारे गन्ने के ट्रैक्टर खड़े हैं। अभी नापतौल भी नहीं हुआ था कि बारिश आ गयी। मंगलाराम ने कहा कि खेत में गन्ने के गिरने से अब इसमे शर्करा कम बनेगा। गन्ने में मिठास कम होने से बाजार में इस गन्ने के रेट भी कम मिलेंगे। मंगलाराम ने सरकार से मांग कि है खेत में खडी गन्ना की फसल को ओले गिरने की वजह से हुए नुकसान का आंकलन कर सरकार मुआवजा दे।

प्रदेश में आए बेमौसमी तूफान पर मीडिया से बात करते हुए राजस्थान के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि मुझे पता चला है कि सूबे के कई जिलों में तूफान के साथ ओले गिरने और बारिश की खबरे है। बारिश से गेंहूं, जौ, सरसों को नुकसान की खबरें है। वहीं कुछ जिलों में गन्ने की फसल गिरने की ख़बरें आयी है। शासन को निर्देश दिए गए है कि रिपोर्ट तैयार कर जल्द सरकार को भेजी जाए। 35 प्रतिशत से अधिक का नुक़सान होने पर नियमानुसार उचित मुआवजा सरकार की तरफ से दिलाया जाएगा। राजस्व विभाग से जिन किसानों की रिपोर्ट 35 फीसदी से ज्यादा नुक़सान की आएगी उनको आगे कृषि विभाग से मुआवजे के लिए फार्म भरना होगा। मंत्री ने कहा कि पीएम फसल बीमा योजना के दायरे में जो भी लाभार्थी किसान आएँगें उन्हे वित्तीय मदद दी जाएगी।

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