चीनी मिल मालिकों को मालामाल करने में लगी सरकार को गन्ना किसानों के हितों का ध्यान नहीं: राष्ट्रीय लोकदल

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10 दिसम्बर, नई दिल्ली: भारत सरकार देश के गन्ना किसानों के कल्याण और विकास के लिए नए नवोन्मेशी प्रयास कर एक औऱ जहां नई नई नीतियां बना रही है वहीं गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी कर किसानो को लाभ दिलाने का काम भी कर रही है। लेकिन देश के सबसे बडे गन्ना उत्पादक राज्य़ उत्तर प्रदेश की सरकार ने बीते दो सालों से गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया है जिससे सूबे के गन्ना किसानों और किसान नेताओं में आक्रोश है।

प्रदेश में गन्ना मूल्य में बढोत्तरी नहीं होने के मसले पर मीडिय़ा से बात करते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार सिर्फ किसानों के साथ होने का ढोंग करती है, किसानों की तरक्की से इनका हक़ीक़त में कोई लेना देना नहीं। अखिलेश ने कहा कि 2012- 13 में हमारी सरकार थी तब हमने 40 रूपये गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी की थी। आजतक किसी सरकार ने इतना नहीं किया। 2016-17 मे हमारी सरकार ने फिर 25 रूपये गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी की लेकिन भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के वक्त मात्र 10 रुपये बढ़ाने के अलावा कुछ नहीं किया। इनकी सरकार सिर्फ महंगाई बढा सकती है गन्ना मूल्य नहीं।

अखिलेश यादव ने कहा कि गन्ना यूपी के किसानों की आर्थिक तरक्की का मुख्य जरिया है। सूबे के 40 से भी अधिक जिले गन्ना उत्पादक है जहां तकरीबन 50 लाख टन गन्ना उत्पादित किया जाता है। इन चालीस जिलों के तकरीबन तीन करोड किसान गन्ने की खेती और गन्ने से जुडे अन्य कामों पर निर्भर है। अगर ऐसे ही हाल रहे तो किसान गन्ने की खेती के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार करेगा।

राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख चौधरी अजीत सिंह ने कहा कि सरकार ने गन्ना किसानों की अनदेखी की है। गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाना सरकार की किसानों के प्रति नकारात्मक सोच को दर्शता है। उन्होने कहा कि चीनी मिल मालिकों को मालामाल करने में लगी सरकार को किसानों के हितों का ध्यान नहीं है। सिंह ने आरोप लगाया कि बीते दो सालों से किसानों को गन्ना का समर्थन मूल्य नही दिया गया। इस बार उम्मीद थी लेकिन सरकार ने न तो गन्ना मूल्य बढ़ाया औऱ न ही गन्ना ढुलाई भाडे में बढ़ोत्तरी की। सिंह ने कहा कि बीते 9 सालों में सरकारों ने सिर्फ 110 रूपये की गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी की है जबकि खाद, बीज औऱ अन्य खर्चो में बोतहाशा वृद्दि हुई है। सिंह ने कहा कि साल 2012-13 में एकबार 40 रूपये गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी हुई थी उसके अलावा हमेशा ऊंट के मुंह में जीरा जैसा काम होता रहा है। भाजपा सरकार जब सत्ता में आयी तब किसानों के साथ वई वादे किए थे लेकिन सत्ता में आने के बाद 2017-18 में मात्र 10 रूपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य में बढोत्तरी की थी उसके बाद से दो साल हो गए 2018-19 एवं 2019-20 में बढ़ोत्तरी नहीं कर गन्ना किसानों की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम हुआ है। सिंह ने कहा की 40 करोड़ रुपये सालाना की नगदी फसल को सरकार इतने हल्के में ले रही है यहां बेहद चिन्तनीय है।

बसपा के शतीष मिश्रा ने इस मसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बहन कु. मायावती जी ने हमेशा किसानों का दुख दर्द समझा है। 2011-12 में जब हमारी सरकार थी तो हमने 35 रूपये गन्ना मूल्य बढ़ाय़ा था। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार ने किसानों के नाम पर सिर्फ वोट लिए है लेकिन काम नहीं किया। जबकि आज खाद, बीज, बिजली, पानी, डीजल, खेती में जुताई सब मंहगी हो रही है ऐसे में अगर सरकार किसानों का गन्ना मूल्य नहीं बढ़ा रही है तो किसानों के साथ इससे बडा अन्य़ाय नहीं हो सकता है।

मेरठ के गन्ना किसान रामरतन ने कहा कि गन्ने की खेती में महेनत और लागत दोनों ज़्यादा लगती है लेकिन उसकी तुलना में फ़ायदा नहीं होता,अब अगर सरकारें किसानों का गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाकर सिर्फ़ उन्हें राम भरोंसे छोड़ने का काम करेगी तो वो दिन दूर नहीं जब हम जैसे किसान गन्ने की खेती छोड़कर अन्य फ़सलों की खेती करने पर ध्यान देने लगेंगे।

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