क्रूड की उच्च कीमतें चीनी बाजार पर सीमित के रूप में काम करेंगी: किरण वाधवाना

 

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चीनी का अधिशेष स्टॉक और वैश्विक कीमतों में गिरावट ने विश्व चीनी उद्योग को परेशान किया है। 2018-19  सीझन में उद्योग को बडी जद्दोजहद करनी पड रही है। चीनी उद्योग में शामिल प्रमुख देश वर्तमान उद्योग परिदृश्य के कारण बहुत ही कठिनाईयों का सामना कर रहे हैं। इस स्थिति  को और बेहतर तरीके से समझने के लिए,  श्री. किरण वाधवाना  (निदेशक, कॉमडेक्स इंडिया लिमिटेड) ने chinimandi.com के साथ एक साक्षात्कार में चीनी उद्योग के अभी के परिदृश्य पर अपनी बात साझा की…

सवाल : ऐसी रिपोर्टें हैं कि , पिछले वर्षों की तुलना में चालू सीझन में चीनी की वैश्विक उपलब्धता में गिरावट जारी रह सकती है। ब्राज़ील पर नज़र डालने पर, यह दिखाई देता है की, चीनी की कीमतों में भारी गिरावट हुई है, जबकि तेल की किमतोें में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 30% से अधिक की बढोतरी हुई है। क्या यह चीनी के उत्पादन की संभावनाओं पर कम करेगा?

जवाब : 2018-19 (मई / अप्रैल) के दौरान ब्राजील ने बडी मात्रा में चीनी से इथेनॉल मेें स्विच किया है। अतीत में यह माना गया था कि, अधिकतम स्विच केवल 10% हो सकता है, हालांकि, हमने इथेनॉल के पक्ष में 15% से अधिक का स्विच देखा, जिससे 2017-18 सीझन में  ब्राजीलियन चीनी उत्पादन अनुमान को 33 मिलियन मीट्रिक टन से घटाकर 2018-19 में 26 मिलियन मीट्रिक टन कर दिया गया। हालांकि, किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि क्रूड की उच्च कीमतें बाजार पर एक सीमित की तरह काम करेगी। और यदि NY नंबर 11 समय की निरंतर अवधि के लिए 13 सेंट पार करता है, तो हम वापस चीनी पर एक बड़ा बदलाव देख सकते हैं।

सवाल : क्या ब्राजील अभी भी आपूर्ति और मांग के संतुलन को बनाए रखते हुए, चीनी की वैश्विक उपलब्धता में प्रमुख भूमिका निभाएगा?

जवाब : ब्राजील शायद एकमेव  ऐसा चीनी निर्यातक है, जो अपने इथेनॉल कार्यक्रम के लिए चीनी की आपूर्ति को बंद करने में सक्षम है और अपनी गन्ने की फसल (लगभग 600 मिलियन मीट्रिक टन) के आकार को देखते हुए, वह दुनिया के चीनी संतुलन में अपनी अग्रणी भूमिका जारी रखेगा।

सवाल : ग्वाटेमाला, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील और अब थाईलैंड ने चीनी पर अपनी नीतियों के लिए भारत को विश्व व्यापार संगठन में खींच रहे है। इस परिदृश्य पर आपके क्या विचार हैं?

जवाब : विश्व व्यापार संगठन में  भारतीय सरकार द्वारा लागू की गई भारतीय चीनी नीति को चुनौती दी गई है। शिकायत बहुत तकनीकी और सरकारी है। मामले में उचित कानूनी सलाह लेने के बाद जवाब दिया जाएगा, मुझे लगता है कि, शिकायतकर्ता सभी सदस्यों को संदेश भेजना चाहते हैं कि वे सदस्य देशों द्वारा बाजार में चीनी की  किमतों पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली सब्सिडी नहीं देने देंगे। इस मामले में, मेरा व्यक्तिगत विचार है कि, विश्व व्यापार संगठन में सभी देशों के बीच एक समझौता  होगा और इसके चलते  चीनी क्षेत्र में बहुत आवश्यक संरचनात्मक सुधार हो सकते है।

सवाल : आप ब्रेक्सिट के बाद यूरोप और यूके के बाजार में चीनी उद्योग के भविष्य को कैसे देखते हैं?

जवाब : ब्रेक्सिट मुद्दे के चलते हमें यह देखने की जरूरत है कि, ब्रिटेन आयात के मामले में क्या करेगा?  ब्रिटेन को आमतौर पर 600 किलो  मीट्रिक टन चीनी आयात की आवश्यकता होती है और लगभग 300 से 350 किलो  मीट्रिक टन अकेले फ्रांस से आती हैं। 12 अप्रैल के बाद यह व्यापार कैसे प्रभावित होगा? क्या ब्रिटेन के अन्य देशों जैसे ब्राजील, भारत और थाईलैंड आदि के साथ व्यापार समझौते होंगे, जिससे उन्हें इसके बाजारों में सुविधा मिल सकेगी? नो डील ब्रेक्सिट के बाद भी, क्या ब्रिटेन में यूरोपीय संघ के लिए कुछ कम टैरिफ होगा? ये ऐसे मुद्दे हैं जो ब्रेक्सिट के बाद युरोपीय संघ और ब्रिटेन में चीनी उद्योग को आकार देंगे।

सवाल : भारतीय चीनी उद्योग के निर्यात अभियान को देखते हुए, आपको 5 मिलियन मीट्रिक टन में से कितने टन निर्यात होने की सम्भावना लगती हैं?

जवाब : मुझे उम्मीद है कि, 2018-19 चीनी वर्ष में 3 से 3.5  मिलियन मीट्रिक टन निर्यात होने की संभावना है।

सवाल : उत्पादन और अगले सीजन की फसल के अनुमानों पर वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए, चीनी के निर्यात पर आपके क्या विचार हैं?

जवाब : 2019-20 सीज़न के लिए महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटका में सुखा और यूपी में उच्च इथेनॉल क्षमता के कारण, मेरा विचार है कि उत्पादन 27 मिलियन मीट्रिक टन होगा।

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