कोल्हापुर और सांगली जिले में ‘चीनी के पहाड’

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कोल्हापुर : चीनीमंडी

कोल्हापुर और सांगली जिले में इस साल भी रिकॉर्ड स्तर पर चीनी का उत्पादन हुआ है, 70 लाख टन चीनी मिलों में पड़ी है। चीनी बिक्री ठप होने कारण कई मिलें एफआरपी चुकाने में भी विफ़ल रही है। मिलों की गोदामों में चीनी का अम्बार लगा है, कई मिलों में तो चीनी रखने के लिए भी जगह नही है। ऐसी स्थिती में मिलों के लिए ‘मीठी चीनी, तीखी मुसीबत’ बनी है।

कोल्हापुर और सांगली जिले की 70 प्रतिशत चीनी गोदामों में पड़ी हैं। कोल्हापुर डिवीजन में कुल 38 मिले है, जिसमे कोल्हापुर में 22 और सांगली जिले में 16 चीनी मिलें हैं। पिछले गन्ना सीजन में चीनी की कीमतों में गिरावट के कारण चीनी उद्योग को बहुत नुकसान हुआ था। कोल्हापुर में 24 लाख टन चीनी बची थी। इस वर्ष, 51 लाख टन उत्पादन किया गया है।

कोल्हापुर क्षेत्र की चीनी को इससे पहले पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत में बड़ी मांग थी। लेकिन कोल्हापुर के बाजार पर अब उत्तर प्रदेश ने कब्जा कर लिया है। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में कम दुरी के चलते परिवहन की लागत भी बहुत कम है। इसलिए, कोल्हापुर क्षेत्रसे पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत में पहुँचते पहुँचते चीनी महंगी हो जाती है। जिससे कोल्हापुर और सांगली की मिलों के सामने मुसीबत खड़ी हुई है। यहाँ की मिलों द्वारा नये बाजार की तलाश शुरू हुई है।

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