अगर चीनी MSP बढ़ती है तो निश्चित तौर पर चीनी मिलों और गन्ना किसानों को कुछ राहत मिलेगी: पूर्व मंत्री

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नई दिल्ली /जयपुर/ मुजफ्फरनगर, 11 मई: कोविड 19 की वैश्विक महामारी से जूझ रहे देश के गन्ना और चीनी उद्योग को आर्थिक मंदी से उबारने के लिए सरकार लगातार गन्ना किसान संगठनों और चीनी उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद कर रही है। वर्तमान हालातों के मद्देनजर चीनी की MSP बढ़ाने की मांग की जा रही है। नीति आयोग द्वारा चीनी की MSP बढ़ाने का सुझाव देने से चीनी मिलों को कितना फायदा होगा, गन्ना किसानो का बकाया चुकाने में कितनी मदद मिलेगी इन सभी मसलो पर हमारे संवाददाता ने उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में पूर्व राज्य मंत्री सीआर चौधरी से बात की तो उन्होने ने कहा कि सरकार हमेशा से ही इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए गंभीर रही है। इसकी मुख्य वजह है चीनी उद्योग से गन्ना किसानों और गन्ना किसानों से चीनी उद्योग की परस्पर निर्भरता का होना है। इस संदर्भ में नीति आयोग ने जो सिफ़ारिश की है उसके पीछे भी यही मकसद है कि किसी तरह किसानों को गन्ना बकाया समय पर दिया जाए। और ये तब ही सम्भव होगा जब चीनी मिलें चीनी का निर्यात कर पायेंगी और कारोबारी गतिविधियाँ करेंगी। चौधरी ने कहा कि नीति आयोग की टास्क फोर्स ने चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 31 रुपये से 33 रुपये प्रति किलोग्राम करने की जो सिफ़ारिश की है इसके लागू होने के बाद निश्चित तौर पर चीनी मिलों को कुछ राहत मिलेगी और उत्पादन लागत का समायोजन होने से उन पर वित्तीय दबाव कम होगा। चीनी मिलों को मिलने वाले इस वित्तीय उपार्जन से उनको गन्ना किसानों का बकाया चुकाने में भी मदद मिलेगी। इससे गन्ना किसान भी आगामी फसल की बुआई के लिए खाद बीज जैसी सामग्री आसानी से खरीद पाएँगे।

सरकार द्वारा चीनी के दाम बढ़ाने के संदर्भ में लिए जा रहे निर्णय पर बात करके हुए मुजफ्फरनगर सहकारी चीनी मिल संघ प्रतिनिधि इकराम खान ने कहा कि प्रदेश में कई चीनी मिलों पर बीते छह माह से किसानों का गन्ना बकाया चल रहा है। कुछ मिलों पर तो गत गन्ना पैराई सत्र का बकाया भी अधूरा है। सरकार के इस निर्णय से उम्मीद है कि गन्ना किसानों का बकाया चुकाने के साथ मिलों को अपने खर्चे निकालने में आसानी होगी। इकरान ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण हुए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से चीनी उद्योग को जो नुक़सान हुआ है उसकी भरपाई के लिए सरकार को अभी और भी कुछ करने की जरूरत है। सरकार सहूलियतें देंगी तब ही देश के गन्ना और चीनी उद्योग का कल्याण होगा।

ग़ौरतलब है कि इससे पूर्व भी फरवरी 2019 में केन्द्र सरकार ने चीनी के एमएसपी में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की थी। तब चीनी का मूल्य 29 रुपये था जिसे बढ़ाकर कर 31 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया था। अब एक बार फिर सरकार अगर चीनी MSP बढ़ाएगी तो उम्मीद की जा रही है कि इससे गन्ना और चीनी उद्योग दोनों को दीर्घकालिक तौर पर फ़ायदा होगा।

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