भारत 2026 तक चीन को पछाड़कर तीसरा सबसे बड़ा एथेनॉल उपभोक्ता बनने की राह पर

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नई दिल्ली : भारत 2026 तक दुनिया के तीसरे सबसे बड़े एथेनॉल उपभोक्ता के रूप में चीन को पछाड़ सकता है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी/International Energy Agency (IEA) ने कहा कि, भारत में 2017 से 2021 के बीच एथेनॉल की मांग तीन गुना बढकर पिछले कैलेंडर वर्ष में 3 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है। एजेंसी ने यह भी कहा की, भारत 2026 तक दुनिया के तीसरे सबसे बड़े एथेनॉल उपभोक्ता के रूप में चीन से आगे निकलने की राह पर है। जनवरी 2021 में, भारत ने 2030 से 2025 तक अपने 20 प्रतिशत एथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्य को आगे बढ़ाया है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने कहा कि, भारत एथेनॉल का समर्थन कर रहा है क्योंकि यह तेल आयात को कम करने, वायु प्रदूषण को कम करने और किसानों के लिए आर्थिक और रोजगार के अवसर प्रदान करने में मदद करता है। भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है। एजेंसी ने कहा कि, भारत ने एथेनॉल सम्मिश्रण बढ़ाने में प्रभावशाली प्रगति की है। गैसोलीन के साथ एथेनॉल सम्मिश्रण दरों में भी वृद्धि हुई है। 2017 में, सम्मिश्रण 2 प्रतिशत था, लेकिन 2021 की गर्मियों तक यह 8 प्रतिशत को छू गया, जिससे देश इस कैलेंडर वर्ष में 10 प्रतिशत सम्मिश्रण प्राप्त करने के ट्रैक पर आ गया।

भारत ने अपनी नीतिगत प्रतिबद्धता को भी बढ़ाया है। अपने 20 प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, देश ने फीडस्टॉक के अनुसार प्रति लीटर एथेनॉल की गारंटीकृत कीमतें निर्धारित की है। नई एथेनॉल क्षमता के लिए स्थापित वित्तीय सहायता, एथेनॉल रोडमैप जारी किया और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अनिवार्य करने की योजना बना रहा है जो उच्च एथेनॉल मिश्रणों पर काम कर सकते है।

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