धान और गन्ने के पुआल जलाने के बजाय इनके अपशिष्ट का उपयोग कर एथनॉल बनाने पर जोर

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हिसार,18 अक्टूबर: हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में पराली जलाने से पर्यावरण हो रहे नुकसान से न केवल मानव स्वास्थ्य खराब हो रहा है बल्कि भूमि की ऊर्वरा शक्ति नष्ट होने से कृषि उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने हरियाणा में आयोजित एक किसान रैली के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि किसान भाई गेंहू, गन्ना और धान जैसी फसलों के पुआल और भूषी के फसल अवशेष को न जलाएं। इसके सदुपयोग पर ध्यान देकर आमदनी लेने पर ध्यान दें।

कृषि मंत्री ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों के लिए गन्ने के अवशेष से बने एथनॉल बनाने को 10 फीसदी मात्रा के रूप में पैट्रोल में मिलाने के लिए बाध्यकारी कर पर्यावरण सरंक्षण का संदेश दिया है। किसान भाई गन्ने या धान की पुआल को खेतों में जलाना बंद करें और एथनॉल बनाने में अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग करें इससे उन्हे अतिरिक्त आमदनी होगी। कृषि मंत्री ने कहा कि जहां भी चीनी मिलें चल रही है वहां गन्ना और धान के अवशेष से एथनॉल बनाने का काम भी किया जा रहा है, इसलिए किसान भाई पर्यावरण जागरुकता की इस मुहिम में शामिल होकर वातावरण को साफ करें और अतिरिक्त आमदनी भी कमाएं। कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा गन्ना उत्पादक राज्य है लेकिन गन्ना, धान और गेंहू के पुआल जलाकर प्रदूषण फैलाने के मामले में अक्सर एनजीटी को हरियाणा और पंजाब को निर्देश देने पडते है। कृषि मंत्री ने कहा कि यूपी में इन दोनों राज्यों से ज्यादा गन्ना पैदा होता है लेकिन वहां पर गन्ने के अवशेष का सदुपयोग शुरु हो गया है। किसान नजदीक स्थिति एथनॉल प्लांट में जाकर भूषी, पुआल और डंठल देते है और उससे एथनॉल तैयार होता है बदले में उनको आमदनी भी होती है।

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. आईएस खैरवाल ने कहा कि गेंहू, धान और गन्ना के डंठल से जैविक खाद बनाने और बिजली पैदा करने के अलावा कप प्लेट या अन्य उत्पाद बनाये जा सकते है। डॉ खैरवाल ने कहा कि हर साल सर्दियों के दौरान हरियाणा और पंजाब में किसान लाखों टन पराली जला देते है इससे पर्यावरण क्षरण के साथ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और ओडीशा तक धुंध के गुब्बार फैल जाते है। इन समस्याओं का सबसे अच्छा समाधान ये ही है कि किसान गन्ना व धान के एक एक डंठल को उपयोगी बनाने के लिए चीनी मिलों में लगे एथनॉल प्लाटं पर लेकर जाएं।

हरियाणा के चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविदयालय के कुलपति डॉ केपी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा किसानों को पराली प्रंबधन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसानों को समझाया जा रहा है कि गन्ना और धान की पुआल को बेकार समझकर आप जला रहे है उससे आमदनी कैसे कमा सकते है।

सिंह ने कहा कि प्रदेश के कृषि विभाग के साथ मिलकर ये अभियान चलाया जा रहा है। इसमें किसानों को गन्ने से एथनॉल बनाने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ पर्यावरण को ग्रीन और क्लीन बनाने का संकल्प भी दिलाया जा रहा है।

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