महाराष्ट्र में गन्ना कटाई समस्या से छुटकारा पाने के लिए जापान करेगा मदद…

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मुंबई : चीनीमंडी

जापान सरकार, जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (JICA) के माध्यम से महाराष्ट्र में एक विशेष गन्ना हार्वेस्टर का परीक्षण करेगी, जिसका उद्देश्य देश में मैकेनाइज्ड हार्वेस्टर की समस्याओं का समाधान करना है। चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ ने कहा कि हार्वेस्टर को दो साल तक परीक्षण के आधार पर चलाया जाएगा ताकि इसमें आवश्यक बदलाव किए जा सकें।

श्रमिकों की समस्याओं से मिलों को मिलेगा छुटकारा…

गायकवाड़ ने कहा कि, मशीन का निर्माण जापान में होगा और इसे भारत में आयात किया जाएगा। चीनी आयुक्त, जापान सरकार, बारामती कृषि विकास केंद्र और वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (VSI) के साथ एक समझौता किया जाएगा, जो महाराष्ट्र में इस्तेमाल की जा रही मशीन को देखेगा और उसके बाद फीडबैक भी देगा। परंपरागत रूप से, मराठवाड़ा और उत्तरी महाराष्ट्र के जिलों के लगभग 5 लाख गन्ना मजदूर गन्ना की कटाई के लिए चीनी मिलों की यात्रा करते हैं। वर्षों से, मिलों को श्रमिकों की समस्याओं का सामना करना पड़ा है क्योंकि ऐसे मामले सामने आए हैं जहां मजदूरों को अग्रिम भुगतान किए जाने के बाद भी वो गन्ना कटाई के लिए नही आते हैं। इसके अलावा, अच्छी बारिश की अवधि के दौरान, अधिकांश मजदूर गन्ने की कटाई के बजाय अपने स्वयं के खेतों पर काम करना पसंद करते हैं।

महाराष्ट्र में लगभग 350 मशीनें: लेकिन 1 प्रतिशत भी कटाई नही होती…

भारत में मैकेनिकल हार्वेस्टर शुरू किए गए हैं और विभिन्न राज्य सरकारों ने मिलों और किसान समूहों को उन्हें खरीदने की अनुमति देने के लिए सब्सिडी योजनाएं चलाई हैं। अकेले महाराष्ट्र में ऐसी लगभग 350 मशीनें हैं, लेकिन उससे 1 प्रतिशत गन्ने की भी कटाई नहीं की जाती है। राज्य सरकार ऐसी मशीनों को खरीदने के लिए मिलों या किसान समूहों को सब्सिडी के रूप में 40 प्रतिशत या 40 लाख रुपये प्रदान करती है। हार्वेस्टर के उपयोग के खिलाफ एक मुख्य तर्क यह है कि वे भारत के गन्ना उगाने वाले क्षेत्रों में प्रचलित छोटी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। हालांकि, बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने तर्कों का खंडन किया है और भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल मशीनों को अनुकूलित करने की बात की है। गायकवाड़ ने कहा, “महाराष्ट्र के लिए तैयार करने के लिए मशीन में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। जुन्नर स्थित विघ्नहर सहकारी चीनी मिल को अगले दो वर्षों के लिए ट्रायल रन के लिए चुने जाने की संभावना है।

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