कर्नाटक के गन्ना किसानों ने आंदोलन गुरूवार तक टाला

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पोंडा: कर्नाटक के गन्ना किसानों ने संजीवनी को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के अधिकारियों को गुरुवार तक उनके बकाये का भुगतान करने का समय दिया। गन्ना किसानों को अधिकारियों ने बुधवार तक चेक तैयार किये जाने का आश्वासन दिया था लेकिन गोवा में मंगलवार को छुट्टी होने के कारण बकाये का भुगतान नहीं हो सका।

किसानों ने कहा कि हम लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। एक-दो दिन इंतजार करने में कोई हर्ज नहीं है। हम गुरुवार तक भी इंतजार करेंगे, लेकिन तब तक यदि भुगतान हमारे खातों में जमा नहीं किया जाता है, तो हम कर्नाटक की सीमा पर गोवा से आने वाले गन्ने को अंदर नहीं आने देंगे।

फैक्टरी के प्रशासक दामोदर मोरजकर ने कहा कि सरकार से बैंक गारंटी और शेयर पूंजी के नवीनीकरण में हुई देरी से भुगतान में देरी हुई है।

संजीवनी के प्रशासक ने कहा कि हालांकि, हमने उनके बकाया के 70% भुगतान की व्यवस्था की है और सभी किसानों को बुधवार तक मिल जाएगा। कर्नाटक ने 13 दिसंबर, 2018 से 28 फरवरी के बीच पिछले पेराई सत्र के दौरान संजीवनी चीनी मिल को लगभग 17,491 टन गन्ने की आपूर्ति की।

चीनी मिल ने गन्ने की दर 2,600 रुपये प्रति टन तय की है। किसान को 1,500 रुपये प्रति टन का भुगतान कर दिया गया है। सिर्फ 1,100 रुपये प्रति टन का भुगतान लंबित है जो कुल 1,92,40,100 रुपए कुल होता है। खानपुर के रैयत संघ के एक सदस्य मारुति गुंडोली ने कहा कि पहली बार उन्होंने भुगतान में देरी की है। इस देरी से गन्ना किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा कि हर साल हम खेती के लिए प्रति हेक्टर लगभग 40,000 रुपये उधार लेते है। यदि भुगतान में देरी होती है, तो हमें पहले के ऋण को चुकाने और नये ऋण लेने में बहुत दिक्कत होती है। मनी लेंडर्स हमें परेशान करना शुरु करते हैं।

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