“कर्नाटक के चीनी मिलों में नहीं आने देंगे गोवा का गन्ना”

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पणजी: अगर 2 दिसंबर तक संजीवनी चीनी मिल द्वारा कर्नाटक के गन्ना किसानों का 1.9 करोड़ रुपये बकाया भुगतान नही किया जाता है, तो कर्नाटक चीनी मिलों को गन्ना भेजने के फैसले पर गोवा सरकार को फिर एक बार सोचविचार करना पड़ सकता है। कर्नाटक के किसानों ने समय पर भुगतान न करने पर गोवा के गन्ने से लदे ट्रकों को राज्य की सीमा पर रोकने की धमकी दी है। कर्नाटक के गन्ना किसानों के एक समूह ने सोमवार को संजीवनी मिल के अधिकारियों से मुलाकात की और कहा कि, उनका बकाया भुगतान किया जाए। उन्हें 2 दिसंबर तक भुगतान का आश्वासन दिया गया है, अगर संजीवनी मिल प्रबंधन अपनी बात रखने में विफल रहती है, तो किसानों ने मंगलवार से आंदोलन करने का फैसला किया है।

कर्नाटक के गन्ना किसानों ने संजीवनी मिल को पिछले पेराई सत्र के दौरान 13 दिसंबर, 2018 से 28 फरवरी, 2019 के बीच लगभग 17,491 टन गन्ना की आपूर्ति की थी। मिल ने कर्नाटक के किसानों को अभी तक प्रति टन 1,500 रुपये प्रति टन का भुगतान किया है। मिल के एक अधिकारी ने बताया कि, संजीवनी मिल ने तब गन्ने की दर 2,600 रुपये प्रति टन तय की थी, किसानों को अभी भी 1,100 रुपये प्रति टन का बकाया है, जो कुल मिलाकर लगभग 1,92,40,100 रुपये है।

रयत संघ के सदस्य मारुति गुंडोली ने कहा कि, मिल ने 3,200 रुपये प्रति टन गन्ने का भुगतान करने का वादा किया था, लेकिन अब इस प्रस्ताव को घटाकर 2,600 रुपये कर दिया है। राज्य सरकार ने गोवा के किसानों को आश्वासन दिया है कि उनके गन्ने को पड़ोसी राज्य की मिलों में भेजा जाएगा, क्योंकि संजीवनी मिल इस सीजन में शुरू नहीं होगी।

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