एथेनॉल और अन्य उपोत्पादों की बिक्री से होने वाले लाभ को गन्ना किसानों और मिल मालिकों के बीच साझा करने की मांग

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बेंगलुरू: केंद्र द्वारा मौजूदा पेराई सत्र के लिए घोषित गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) को बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों ने मंगलवार को बेंगलुरु में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने शहर के रेलवे स्टेशन से फ्रीडम पार्क तक मार्च किया। उन्होंने विधान सौध चलने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें फ्रीडम पार्क में रोक दिया। बाद में, कर्नाटक राज्य गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष कुरबुर शांता कुमार के नेतृत्व में कुछ किसानों ने मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा। किसानों का दावा है कि, केंद्र सरकार द्वारा घोषित 2,900 रुपये प्रति टन एफआरपी इनपुट लागत को कवर नहीं करता है, और किसान 3,500 रुपये प्रति टन चाहते हैं। शांतकुमार ने कहा, पिछले साल एफआरपी 2,850 रुपये प्रति टन था, इसमें इस बार सिर्फ 50 रुपये की बढ़ोतरी की है।

किसानों ने कहा की, छले साल से पहले दो साल तक कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी,लेकिन पिछले वर्षों में गन्ने की खेती की लागत लगभग दोगुनी हो गई है। अन्य मांगों में किसानों ने कहा कि राज्य सरकार को चीनी मिलों को तुरंत बकाया चुकाने के लिए कहना चाहिए। यदि भुगतान में देरी होती है, तो मिलों को 15 प्रतिशत ब्याज चुकाने के निर्देश देने चाहिए। किसान यह भी चाहते हैं कि एथेनॉल और अन्य उपोत्पादों की बिक्री से होने वाले लाभ को उनके और मिल मालिकों के बीच साझा किया जाए और गन्ना को पीएम फसल बीमा योजना के दायरे में लाया जाए। चीनी मंत्री शंकर पाटील मुनेनकोप्पा ने कहा कि,उन्होंने गन्ना उत्पादकों के मुद्दों पर पहले ही केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। पाटिल ने कहा, मैं संबंधित केंद्रीय मंत्री से दो बार मिल चुका हूं और जल्द ही उनसे दोबारा संपर्क करूंगा।

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