जानिए BSE हमें कैसे सिखाता है व्यापार में बदलाव – ट्रेडिशनल से डिजिटल

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कुछ दशक पहले, शेयरों को खरीदने और बेचने का मतलब था कि आपको दो चीजों की जरूरत थी – पूंजी बाजारों में वित्तीय सूझ बुझ और महत्वपूर्ण रूप से, स्टॉक एक्सचेंज के अंदर गड्ढे जैसे बने एक जगह में ‘ओपन आउटक्राई’ में भाग लेने के लिए एक दमदार आवाज। लेकिन अब इसके लिए ऐप है। लेकिन हम यहां तक कैसे पहुंचे यह एक इनोवेशन और प्लेटफार्म प्ले के नजरिये से बहुत ही दिलचस्प है।

आपको बता दे प्लेटफार्म प्ले आज अधिकांश उत्पाद कंपनियों के लिए एक वास्तविक विजन और रोड मैप है। यह मांग और आपूर्ति के बीच सूचना को नियंत्रित करने और बीच में कई मध्यस्थता खोजने के सिद्ध मॉडल से उपजा है। ई-कॉमर्स वेबसाइट, जॉब पोर्टल्स, स्टॉक एक्सचेंज, ऐप स्टोर, म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप, कमोडिटी ट्रेड पोर्टल्स, प्लेटफॉर्म प्ले के बेहतरीन उदाहरण हैं।

ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता है की कुछ सेक्टर से जुड़े लोगों की तरक्की के लिए एक प्लेटफार्म या मार्केटप्लेस तैयार करते है, और अगर उन्होंने तैयार कर भी लिया तो उन्हें उससे जुड़े प्लेयर्स का क्रोध झेलना पढता है भले ही उनका खुद का नुकसान क्यों न हो लेकिन वह उसका विरोध करते रहते है। पिछले हफ्तों में ऐसा ही कुछ देखा गया है की कुछ लोग कैसे बदलाव से असंतुस्ट है और खासतौर पर टेक्नोलॉजी से संचालित होने वाले बदलाव जो व्यापार के नियमों और सीमाओं को आगे बढ़ाते हैं। हालही में आयनॉक्स फिल्म निर्माताओं पर थेटर्स को छोड़ देने और सीधे मूवी वीडियो ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज करने से असंतुष्ट है।

ऐसे सैकड़ों किस्से है, जहा विरोध करने वाले लोग कुछ नया करने में असफल रहे और जब कोई और उनके लिए कुछ अच्छा नया करता है तो उसे अपनाने के बजाय उसका विरोध करते है भले ही इससे वे विलुप्त क्यों न हो जाए।

आये यह दो परिदृश्यों को समझे :
दक्षिण महाराष्ट्र में हल्दी और चीनी व्यापारी ई-मार्केट प्लेस और ट्रेडिंग पोर्टल्स को लेकर असंतुस्ट है।

कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के एक एग्रो कमोडिटी ट्रेडिंग पोर्टल eNAM ने महाराष्ट्र में इस महीने कुल 28,167 क्विंटल हल्दी के कारोबार से 16 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन दर्ज किया है। यह लॉकडाउन के कारण हुआ क्यूंकि किसानों को यहाँ एक उम्मीद की आखिरी किरण के तौर पर आना पड़ा। आज तक, अधिकारियों का मानना है कि व्यापारियों के प्रतिरोध के कारण यह प्लेटफार्म परिचलन नहीं कर पाया है।

eBuySugar.com एक निजी स्वामित्व वाला पोर्टल है, जो सभी आकार के व्यापारियों के लिए चीनी व्यापार की सुविधा देता है. और उनके हित में काम करता है। कई लोगो से इसे बहुत प्रसंशा मिल रही है क्यूंकि इस पोर्टल के चलते बेचवाल और लेवाल दोनों को काफी सारे लाभ मिल रहे है, जिसमें चीनी बेचने वाले को नए ग्राहकोंकी शृंखला मिलेगी और लेने वेले को वाजिव दाम पर चीनी मिलेगी। जिस डेस्टिनेशन तक चीनी पहुँचने वाली है वहां तक का इन्शुरन्स प्रदान किया जा रहा है। लेकिन कुछ विरोधी, पूरी बात को समझे बगैर ही इसका विरोध कर रहे है। यह पोर्टल किसी को भी शामिल होने या व्यापार करने से नहीं रोकता है, लेकिन मानव प्रतिरोध एक अच्छे बदलाव आने में दिक्कतें पैदा करती है। Amzaon को भी इसका अनुभव करना पडा था जब जनवरी में उनके भारत दौरे पर अखिल भारतीय व्यापारी संघ ने विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया था।

इस सप्ताह घोषित आवश्यक वस्तु अधिनियम में नए बदलाव का उद्देश्य किसानों के लिए बेहतर ई-व्यापार की सुविधा और मंडी और पारंपरिक व्यापार मार्गों को कम करना है। किसान और व्यापारी अगर इसे नहीं अपनाते तो उनके दिवालिया होने का खतरा बढ़ जाता है।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि नया लोगो के हित में लिया गया नया एजेंडा राज्य या एक निजी संस्था द्वारा निर्धारित किया गया है; कुछ भी नया अपनाने का विरोध करने का आग्रह अज्ञात लोगो के भय से उत्पन्न होता है। लेकिन जब पदाधिकारी हितधारकों का विश्वास जीत सकते हैं, तो यह संबंधित सभी पक्षों के लिए उल्लेखनीय वृद्धि और व्यापारिक गतिविधि को एक गति दे सकती है। BSE इसका एक प्रमुख उदाहरण है – जो आज एक विशाल मंच बन गया है।

18 वीं शताब्दी के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना हुई थी, लेकिन उससे पहले, बॉम्बे बंदरगाह के पास के रास्ते में एक बरगद के पेड़ के नीचे लोगों का एक समूह शेयर खरीद और बेचा किया करता था। 1874 तक उन्हें अपने सिर के ऊपर छत मिली और यहाँ से इसका परिचालन करना शुरू हुआ। करीब 80 साल बाद इसे भारत सरकार से मान्यता मिली।

परंपरागत रूप से आपको बीएसई ट्रेडिंग फ्लोर पर व्यक्तिगत तौर पर खुद होना पड़ता था, और ट्रेड करने के लिए पल्पिट से चिल्लाना पड़ता था। 1995 में, उन्होंने खुले आउटरक्राई फ्लोर ट्रेडिंग एक्सचेंज को खत्म किया और एक स्वचालित, स्क्रीन-आधारित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर स्विच किया, जिसे बीएसई ऑन-लाइन ट्रेडिंग (BOLT) कहा जाता है। इसी समय के आसपास SEBI ने डीमैट खाते को पूंजीगत साधनों के कागज या भौतिक होल्डिंग से दूर करने के लिए पेश किया था।

आज, BSE को दुनिया में सबसे अधिक सूचीबद्ध कंपनियों के साथ एक्सचेंज होने का सौभाग्य प्राप्त है। BSE सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। लेकिन सराहनीय बात यह है कि छोटे से लेकर बड़े संस्थागत व्यापारी कैसे आराम से BSE के माध्यम से कैपिटल मार्केट्स में भाग ले पाते है बिना अपने घर या काम डेस्क छोड़े।

सोचिये आज हालत कैसे होते अगर हर शेयर व्यापार के लिए आपको वहा खुद होना पड़ता और वित्तीय सूझ बुझ और दमदार आवाज के ताकत पर मुनाफा पाना होता। तो शायद आज वर्तमान वाला BSE हम नहीं देख पाते। 1995 में भी आनाकानी और डराने वाले लोग थे, लेकिन इन्हे पछाड़ दिया गया और इससे जुड़े लोगो के भलाई के लिए एक नया प्लेटफार्म तैयार किया गया। इन सब से बाहर निकल कर BSE ने अपने आपको एक नया रूप दिया है।

क्या आप इसे English में पढ़ना चाहेंगे? क्लिक करे यहाँ Economic Times: A lesson coated with turmeric: What the 140-year old BSE can teach us about innovation

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