महाराष्ट्र: दिवाली, किसान संगठनों के आंदोलन के मद्देनजर गन्ना पेराई सीजन की धीमी शुरुआत

कोल्हापुर: प्रदेश में किसान संगठनों द्वारा पिछले साल के गन्ने के लिए प्रति टन 400 रुपयों का अतिरिक्त भुगतान और इस साल के गन्ना मूल्य को लेकर शुरू आंदोलन, और दिवाली के त्योहार की पृष्ठभूमि में प्रदेश में गन्ना सीजन की शुरुआत धीमी रही है। चीनी आयुक्त कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि, चीनी मिलों की पेराई लाइसेंस प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी होने की संभावना है और दिवाली के बाद पेराई में तेजी आएगी। पिछले दो सीजन की तुलना में इस साल बारिश की कमी के कारण गन्ना उत्पादन कम होने की आशंका है।

अब तक 137 मिलों को पेराई लाइसेंस जारी: चीनी आयुक्त डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार

2023-24 के पेराई सीजन में हिस्सा लेने के लिए 217 चीनी मिलों ने चीनी आयुक्तालय को पेराई लाइसेंस के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किए थे। अब तक उनमें से 137 को लाइसेंस दिए जा चुके है। चीनी आयुक्त चीनी आयुक्त डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार ने ‘चीनीमंडी’ से बातचीत में बताया कि, 80 चीनी मिलों के प्रस्ताव अभी भी लंबित है। डॉ. पुलकुंडवार ने बताया कि, एफआरपी बकाया, गन्ना निगम की कटौती राशि व अन्य धनराशि का भुगतान करने के बाद संबंधित चीनी मिलों को गन्ना पेराई लाइसेंस मुहैया कराया जायेगा।

पेराई के लिए 1 हजार 78 लाख टन गन्ना उपलब्ध

चीनी आयुक्तालय के मुताबिक, इस साल राज्य में 1 हजार 78 लाख टन गन्ना उपलब्ध होगा। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस गन्ने का 90 प्रतिशत गन्ने की पेराई के लिए जाएगी। गन्ने की कम उपलब्धता के कारण राज्य में पेराई मौसम केवल तीन महीने तक चलने की संभावना है। कर्नाटक की चीनी मिलों द्वारा सीमावर्ती इलाकों में गन्ने की तस्करी की आशंका से महाराष्ट्र के मिलर्स डरे हुए है।

कोल्हापुर की 20 चीनी मिलर्स द्वारा संयुक्त बयान जारी

जिले की 20 चीनी मिलों ने एक संयुक्त बयान जारी कहा की, अगर समय पर चीनी मिलें शुरू नहीं हुईं, तो आने वाले कटाई मजदूरों के लिए भोजन और चारे की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इसके अलावा यह आशंका व्यक्त की है कि कर्नाटक में मिलें खुलने से कुछ कटाई मजदूर पलायन करने की आशंका है और उनको दी गयी अग्रिम राशि भी डूब जाने का खतरा है। बयान में आगे कहा गया है कि, फिलहाल कर्नाटक चीनी मिलों के वाहन सीमा क्षेत्र में प्रवेश कर चुके है, वह महाराष्ट्र का गन्ना ले जाने की संभावना है। इस सीजन में गन्ने की कमी से पेराई सीजन केवल तीन से साढ़े तीन माह तक चलेगा, इसलिए उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। इसलिए अनुरोध है कि गन्ना किसानों के साथ-साथ सभी किसान संगठन भी फैक्ट्री शुरू करने में सहयोग करें।

स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के आज के ‘गन्ना सम्मेलन’ पर टिकी नजरे

स्वाभिमानी शेतकरी संगठन द्वारा 22वां गन्ना सम्मेलन आज, 7 नवंबर को जयसिंगपुर (कोल्हापुर जिला) के विक्रमसिंह मैदान में आयोजित किया जा रहा है।गन्ना सम्मेलन में पूर्व सांसद राजू शेट्टी द्वारा आंदोलन की नई दिशा तय की जाएगी। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन की मुख्य मांग है कि, पिछले साल के गन्ने का अतिरिक्त 400 रुपये प्रति टन भुगतान किया जाए, राज्य में चीनी मिलों के तौल कांटे डिजिटल हों। कोल्हापुर और सांगली जिलों में आंदोलन को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। गन्ना सम्मेलन में क्या फैसला होता है? इसपर पुरे राज्य की नजरे टिकी हुई है।

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