मिलों को चीनी में कटौती और इथेनॉल उत्पादन को बढावा देने की सलाह

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औरंगाबाद : महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ फेडरेशन द्वारा चीनी अधिषेश की समस्या से छुटकारा पाने के लिए मिलों को इथेनॉल उत्पादन को बढावा देने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। महाराष्ट्र देश का दुसरा सबसे बडा गन्‍ना और चीनी उत्पादक राज्य है। इस साल राज्य में बंपर गन्‍ना उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिसके चलते अभी से मिलों को इथेनॉल उत्पादन के लिए बढावा दिया जा रहे, ताकि इस साल चीनी अधिषेश की समस्या कुछ हदतक कम हो सके। महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ फेडरेशन के अध्यक्ष जयप्रकाश दांडेगांवकर ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि, इथेनॉल उत्पादन को बढावा देने से चीनी मिलों को अपना घाटा कम करने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा,”देश में लगभग 250 लाख मीट्रिक टन चीनी की की आवश्यकता होती है, इसके मुकाबले देश में ज्यादा चीनी का उत्पादन होता है। तीन से चार महीने तक के बफर स्टॉक के बावजूद देश में पर्याप्त चीनी है। निर्यात के बाद भी अधिशेष चीनी की समस्या कायम रहती है। इसलिए, चीनी के उत्पादन में कटौती और इथेनॉल उत्पादन में बढोतरी मिलों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। महाराष्ट्र हर साल 90 से 100 लाख टन चीनी का उत्पादन करता है। हम हर साल चीनी उत्पादन में 10 लाख टन की कटौती करने पर जोर दे रहे हैं, और इथेनॉल का उत्पादन बढाने की कोशिशों मे जुटे हैं।

देश में 2022 तक पेट्रोल के साथ 10 प्रतिशत इथेनॉल संमिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार भी चीनी की जगह इथेनॉल उत्पादन करने वाली मिलों को प्रोत्साहन दे रही है,जो मिलों को चीनी के उत्पादन से होनेवाले नुकसान पर काबू पाने में मदद करेगा। दांडेगांवकर ने कहा, हम 2021-22 तक चीनी उत्पादन को कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने की योजना बना रहे हैं। इथेनॉल उत्पादन के लिए मिलों को किसी भी अतिरिक्त सेट-अप की आवश्यकता नहीं है। यदि किसी मिल को इथेनॉल उत्पादन के लिए नए बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता है, तो सरकार ऐसी मिलों को आर्थिक सहायता भी कर रही है।

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