उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से मुकाबला करने के लिए महाराष्ट्र के चीनी मिलों को ‘बेलआउट पैकेज’ की उम्मीद

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मुंबई / पुणे : चीनी मंडी

महाराष्ट्र में नकदी की किल्लत से जूझ रहे चीनी उद्योग ने महागठबंधन सरकार से खुद को बचाए रखने और अपने समकक्षों से विशेषकर उत्तर प्रदेश से मुकाबला करने के लिए ‘बेलआउट पैकेज’ मांगा है। राज्य के वित्त मंत्री जयंत पाटिल ने कहा, “उचित और पारिश्रमिक मूल्य (FRP) के अनिवार्य भुगतान और चीनी की कीमतों में वृद्धि की कमी के मद्देनजर, चीनी उद्योग वित्तीय तनाव से गुजर रहा है। चीनी उद्योग ऋण का पुनर्गठन करना चाहता है और प्रोत्साहन राशि की मांग की जा रही है। सरकार चीनी उद्योग को संकट से बाहर निकलने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए कटिबद्ध है।”

महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज फेडरेशन के प्रबंध निदेशक संजय खताल ने कहा कि, चीनी विकास निधि से ऋण सहित सभी ऋणों के पुनर्गठन की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश की मिलों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए, सरकार को 250 रुपये प्रति क्विंटल का परिवहन अनुदान प्रदान करने की आवश्यकता है, ताकि उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में मिलें चीनी बेच सकें।”

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