महाराष्ट्र: चीनी मिलों के सामने मजदूरों की कमी की समस्या

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मुंबई : महाराष्ट्र में भीषण गर्मी का मौसम है और अधिक मात्रा में गन्ने की पेराई अभी बाकी है। मराठवाड़ा क्षेत्र के अधिकांश गन्ने की पेराई अभी बाकी है।कई मिलों को श्रमिकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। गन्ना श्रमिक या तो बीच में छोड़ रहें हैं या गर्मी के कारण फसल के लिए अतिरिक्त पैसे की मांग कर रहें हैं, जिससे मिल मालिकों को पड़ोसी गन्ना उत्पादक राज्यों से हार्वेस्टर की तलाश करनी पड़ती है। गन्ना हार्वेस्टर के लिए कर्नाटक और गुजरात में भी संपर्क किया जा रहा है। मिलें पेराई को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही हैं क्योंकि चीनी आयुक्तालय ने उन्हें परिचालन बंद करने से पहले लिखित अनुमति लेने के निर्देश दिए है।

हार्वेस्टर प्रतिदिन लगभग 5.7 एकड़ में गन्ने की पेराई कर सकते हैं, जबकि मैनुअल मजदूरों द्वारा एक दिन में 1.5 एकड़ में गन्ने की पेराई की जाती है। राज्य में औसतन लगभग 8-10 लाख मजदूर गन्ना कटाई में लगे हुए हैं।

महाराष्ट्र के पारंपरिक चीनी बेल्ट सांगली और कोल्हापुर में मिलों ने अपना सीजन समाप्त कर दिया है, लेकिन पुणे, सोलापुर, मराठवाड़ा और अहमदनगर में मिलें अभी भी गन्ने की पेराई कर रहे हैं।

फाइनेंसियल एक्सप्रेस के मुताबिक, चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ ने कहा कि, वे यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं कि 31 मई तक गन्ने की पेराई हो जाए। महाराष्ट्र में पेराई का मौसम आम तौर पर 120 से 140 दिनों और अधिकतम 145 दिनों तक रहता है। उन्होंने कहा कि, इस साल करीब 20 चीनी मिलें गन्ने के अधिक उत्पादन के कारण 160 दिनों तक चलेंगी।

इस सीजन में, महाराष्ट्र में मिलों को रिकॉर्ड उच्च मात्रा में चीनी का उत्पादन करने की उम्मीद है। अब तक सीजन शुरू करने वाली 198 मिलों ने 122.8 मिलियन टन गन्ने की पेराई की और 12.81 मिलियन टन चीनी का उत्पादन किया।

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