महाराष्ट्र में गन्ना किसानों का एफआरपी 750 करोड़ रुपये बकाया

मुंबई : चीनी मंडी

नये गन्ना क्रशिंग सीझन का आगाज होने जा रहा है, लेकिन अभी भी महाराष्ट्र में 70-72 चीनी मिलों द्वारा उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के तहत 750 करोड़ रुपये से अधिक गन्ना बकाया राशि देना बाकि हैं। महाराष्ट्र में केन कंट्रोल बोर्ड (सीसीबी) के किसान प्रतिनिधियों ने मिलों से इन बकाया राशि का भुगतान और उसके ब्याज की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग उठाई है की, जो चीनी मिलें किसानों का भुगतान करने में नाकामियाब हुई है, उन्हें क्रशिंग लाइसेंस नहीं दिया जाना चाहिए। मौजूदा सीजन के लिए, एफआरपी बकाया लगभग 221 करोड़ रुपये के आसपास हैं।

पुणे डिवीजन में 20 कारखानों के पास 50 करोड़ बकाया

स्वाभिमानी शेतकरी संघटन (एसएसएस) नांदेड़ इकाई के अध्यक्ष और सीसीबी सदस्य प्रल्हाद इंगोले, शिवानंद दारेकर, भानुदास शिंदे और पांडुरंग थोरात समेत पांच किसान प्रतिनिधियों ने महाराष्ट्र चीनी आयुक्त से लंबित एफआरपी बकाया राशि का भुगतान करने के लिए मुलाकात की। इंगोले ने बताया की, पुणे डिवीजन में 20 कारखानों के पास 2016-17 सीजन की `50 करोड़ की आरएसएफ बकाया राशि है।

एफआरपी भुगतान देरी पर 15% ब्याज का प्रावधान

2017-18 के मौसम के लिए आरएसएफ की तय की जानी चाहिए और ‘सीसीबी’ सदस्यों ने मांग की है कि, जब तक ये लंबित भुगतान नहीं किए जाते हैं, तब तक क्रशिंग लाइसेंस नहीं दिए जाने चाहिए। यदि एफआरपी भुगतान में देरी हो रही है, तो 15% ब्याज का प्रावधान है और आरएसएफ देरी के मामले में, 12% ब्याज के लिए प्रावधान है।

इंगोले के मुताबिक, 2017-18 सीज़न के लिए आरएसएफ की गणना अभी तक की जा रही है। 2016-17 सत्र के लिए, सीसीबी ने `96 करोड़ के आरएसएफ भुगतान को अंतिम रूप दिया था। हालांकि, हाल ही में बोर्ड की बैठक में, यह पता चला था कि, 29 मिलों में से 20 ने अभी तक आरएसएफ के अपने हिस्से का भुगतान नहीं किया है। बैठक के दौरान, यह निर्णय लिया गया कि, एक लेखा परीक्षक के साथ विशेषज्ञों की एक विशेष समिति आरएसएफ की गणना के तरीके की समीक्षा करेगी।

‘उन’ मिलों को क्रशिंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाना चाहिए…

इंगोले ने यह भी कहा कि, जो मिलें आरएसएफ भुगतान करने में विफल रहते हैं उन्हें इस सीझन में क्रशिंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाना चाहिए। राजस्व रसीद प्रमाणपत्र नोटिस 25 कारखानों को जारी किए गए हैं। ऐसे मामले हैं जहां नीलामी छह बार आयोजित की गई, लेकिन कोई खरीददार नहीं मिला। सीसीबी की मुंबई बैठक में, किसानों के नाम पर भूमि अभिलेखों को स्थानांतरित करने के लिए एक सिफारिश की गई थी। यह देखा गया है कि कारखानों ने जमीन बेच दी है, भले ही इसे आरआरसी के तहत नोटिस जारी किया गया हो। बिक्री के मामले में, सरकार को रेडी रेकनर वैल्यू के अनुसार किसानों की बकाया राशि का भुगतान करना चाहिए।

नया चीनी मौसम 20 अक्टूबर से होगा शुरू

एफआरपी का मूल आधार चीनी उत्पादन और दैनिक रिकवरी रिपोर्ट है, जो प्रशासन को भेजी जाती है और फिर दर तय की जाती है। उन्होंने कहा कि, इन रिपोर्टों की जांच की जानी चाहिए और एक किसान प्रतिनिधि को शामिल किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र चीनी आयुक्त संभाजी कडू- पाटिल ने राज्य में मिलर्स को चेतावनी दी है कि, वे नए मौसम की शुरूआत करने से पहले पिछले साल का किसानों का लंबित निष्पक्ष और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बकाया चुकाए ।राज्य का नया चीनी मौसम 20 अक्टूबर से शुरू होने वाला है।

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