कर्नाटक के फैसले से महाराष्ट्र की चीनी मिलें खफा

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कोल्हापुर: चीनी मंडी

कर्नाटक सरकार ने राज्य में गन्ने के परिवहन पर प्रतिबंध (झोनबंदी) लगाने का फैसला किया है। इससे सीमावर्ती क्षेत्र कि चीनी मिलें प्रभावित होने की संभावना है। इस साल भारी बाढ़ के कारण सांगली, कोल्हापुर जिले में गन्ने का उत्पादन काफी मात्रा में कम हुआ है और अब कर्नाटक द्वारा ‘झोनबंदी’ कानून लागू करने से इस सीजन में कोल्हापुर जिले के सीमावर्ती मिलों को गन्‍ने के लिए बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। कर्नाटक के गन्‍ना मंत्री सी.टी.रवि और कर्नाटक कि चीनी मिलर्स की एक बैठक में ‘झोनबंदी’ कानून लागू करने का फैसला लिया गया था। इस बीच, महाराष्ट्र में चीनी मिलों ने इस फैसले का विरोध करने का निर्णय लिया है। पिछले साल कर्नाटक में भयंकर सूखे के कारण गन्ने के उत्पादन में भारी गिरावट आई है। बाढ़ के वजह से कर्नाटक और महाराष्ट्र के कई मिलों को अपने पेराई सीज़न के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए काफी मुशक्‍कत करनी पड सकती है। गन्‍ने की कमी के कारण सीमावर्ती इलाकें की चीनी मिलें केवल दो महीने तक चलने की संभावना है।

गन्ना उत्पादन में कमी के कारण कर्नाटक के गन्ना उत्पादक महाराष्ट्र कि मिलों को गन्ना भेजने के लिए तैयार हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि, महाराष्ट्र की मिलें कर्नाटक कि मिलों की तुलना में प्रतिटन 400 से 500 रूपये तक ज्यादा और समय पर भुगतान करती हैं। कर्नाटक कि कई मिलों ने तो अब तक बकाया भुगतान नहीं किया है। कर्नाटक के मिलर्स ने बेलगावी में प्रदेश के गन्‍ना मंत्री टी. रवि से मिलकर कर्नाटक राज्य से महाराष्ट्र में गन्ना भेजने पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था। चूंकि ज्यादातर मिलें विधायकों और सांसदों की हैं, उसके कारण मंत्री रवि ने अप्रत्यक्ष रूप से गन्ना प्रतिबंध की घोषणा की है और इस तरह के निर्देश जिला प्रशासन को दिए गए हैं।

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