मिलों द्वारा इथेनॉल उत्पादन शुरू

बिजनौर : चीनी मंडी

बिजनौर में गन्ने की फसल से चीनी के अलावा इथेनॉल और अन्य उत्पाद बनाकर राजस्व बढ़ाने के लिए चीनी मिलों ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। जिले की दो चीनी मिलों में से एक चीनी मिल आसवनी (डिस्टलरी) इकाई की क्षमता बढ़ा रही है। धामपुर चीनी मिल शीरे को सीधे इथेनॉल बनाने में प्रयोग कर रही है। मिलों के इस कदम से किसानों का गन्ना बकाया भुगतान करना थोडा आसान हो सकता है।

बिजनौर जिले में कुल नौ चीनी मिलें हैं। इन चीनी मिलों में से केवल पांच चीनी मिलों की आसवनी इकाई/डिस्टलरी प्लांट हैं। केंद्र सरकार चाहती है कि, चीनी मिल गन्ने के रस से सीधे या फिर शीरे से इथेनॉल बनाएं। इसके लिए चीनी मिलों को आसवनी इकाई की क्षमता बढ़ाने के लिए कहा जा रहा था। जिले की धामपुर, स्योहारा, बरकातपुर, बुंदकी व नजीबाबाद चीनी मिल की आसवनी इकाइयां हैं। धामपुर चीनी मिल ने अपनी आसवनी इकाई की क्षमता 200 किलोलीटर प्रति दिन से बढ़ाकर 250 किलोलीटर प्रतिदिन व बरकातपुर चीनी मिल ने 75 से बढ़ाकर 150 किलो लीटर प्रतिदिन कर ली है। इसके अलावा स्योहारा चीनी मिल की आसवनी इकाई की दैनिक क्षमता 100, बुंदकी की 90 व नजीबाबाद की 40 किलोलीटर प्रतिदिन है। बुंदकी चीनी मिल अपनी आसवनी इकाई की क्षमता 130 किलो लीटर प्रतिदिन कर रही है।

एक क्विंटल गन्ने में साढ़े चार लीटर तक शीरा बनता है। एक क्विंटल शीरा करीब 22 क्विंटल गन्ने से बनता है। वर्तमान में एक क्विंटल शीरे का दाम दस रुपया है। एक क्विंटल शीरे से 22 लीटर तक एथनॉल बनाया जा रहा है। एक लीटर एथनॉल 43 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इथेनॉल एक तरह का ईंधन ही होता है। इसे पेट्रोल में मिलाया जा सकता है। पेट्रोल व एथनॉल की मिलावट से किसी तरह की हानि नहीं होती है। फिल्हाल पेट्रोल में दस प्रतिशत तक एथनॉल मिलाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे चीनी के अधिक उत्पादन का संकट खत्म हो जाएगा। तेल आयात से होने वाला खर्च कम होगा और विदेशी मुद्रा बचेगी।

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