अब गन्ने की मिठास और बढ़ेगी

चीनी मिले कर सकेंगी इथेनोल का निर्माण: किसानों को भी ‘अच्छे दिन’ !

चीनी मंडी : पिछले कई सालों से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही चीनी मिले और गन्ना किसानो को कुछ राहत देनेवाला कानून भारत सरकारने बनाया है, इस कानून के तहत अब इसके आगे चीनी मिले चीनी की जगह इथेनोल का भी निर्माण कर सकती है. दुसरे देशों से पेट्रोलियम प्रोडक्ट की आयात करने में भारत सरकार को बहुत सारा विदेशी चलन खर्च करना पड़ता है, इसकी वजह से इकॉनोमी पर बोज़ बढ़ रहा है, इससे राहत पाने के लिए ही सरकार ने चीनी मिलो को ब्राजील की तर्ज पर गन्ने से चीनी और इथेनोल निर्माण की इजाजत देने का फैसला किया है. यह फैसला चीनी उद्योग को अपनी आर्थिक स्थिती सुधारने के लिए फायदेमंद हो सकता है…

२६ जुलाई को केन्द्रीय खाद्य एवंम आपूर्ती मंत्रालय के सचिव राकेश मुकुल ने राजपत्र जारी किया. इस के लिए शुगर कंट्रोल आदेश १९६६ में एतिहासिक बदलाव किया गया है. इसके तहत ६०० लिटर इथेनोल की गिनती १ हजार किलो चीनी प्रोडक्शन के बराबर मानी जाएगी और एक महत्वपूर्ण बात केवल चीनी मिलों को ही गन्ने के ज्यूस से इथेनोल निर्माण की अनुमती दे दी गयी है. १ टन गन्ने से ७५-८० लिटर इथेनोल का निर्माण हो सकता है…इससे गन्ना किसानों की आमदनी भी बढ़ सकती है.

कई सालों से चीनी मिले और देशभर की गन्ना किसान संघठनो की तरफ से गन्ने से इथेनोल निर्माण की मांग की जा रही थी. अब इस कानून से चीनी मिले और गन्ना किसानों को ‘अछे दिन’ आने की सम्भावना बढ़ गयी है…भारत सरकार को भी पेट्रोलियम प्रोडक्ट की आयात के लिए जादा करन्सी खर्च नहीं करनी पड़ेगी. उससे देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होने के आसार है.

देश की गन्ना/चीनी उत्पाद की सम्भावना :
चीनी : ३५०- ३५५ लाख टन
गन्ने का बुआई : ११.४२ लाख हेक्टर्स
इथेनोल की कीमत : ४७.५० रु. लिटर
इथेनोल ब्लेंडिंग : १० प्रतिशत

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