शरद पवार जी हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं क्यूंकि उन्हें भी लगता है की चीनी मिलों और गन्ना किसानों को इससे फायदा होगा: रोहित पवार

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कोल्हापुर: जहां भारतीय चीनी उद्योग अत्यधिक स्टॉक, उच्च उत्पादन लागत, गन्ना बकाया आदि के संकट से उबरने के लिए गन्ने से इथेनॉल उत्पादन जैसे उपाय अपना रहा है और वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे भी दिग्गज हैं जो आधुनिकीकरण, प्रौद्योगिकियों, बेहतर प्रक्रियाएं अपना कर उद्योग को प्रगति की राह पर ले जा रहे है।

महाराष्ट्र जो की गन्ने के रोपण में शीर्ष माना जाता है, अब चुकंदर से चीनी की उतप्दान पर जोर देगा।

अगर चीनी उद्योग के लिए विभिन्न सुधार लाने और क्रांतिकारी बदलाव की बात करे तो माननीय शरद पवारजी हमेशा से सबसे आगे रहे हैं। उनके विवेकपूर्ण मार्गदर्शन और दृष्टि के अनुसार चुकंदर की खेती से किसानों और मिलरों को फायदा होगा, महाराष्ट्र में यह प्रयोग कितना सफल होगा, इसकी जांच के लिए विभिन्न विचार-विमर्श चल रहे हैं।

शरद पवार महाराष्ट्र के उद्योग के कुछ दिग्गजों के साथ दिसंबर 2018 में यूरोप की शैक्षिक और अनुसंधान यात्रा पर थे और उसके बाद वे महाराष्ट्र राज्य में चुकंदर के भाग्य का फैसला करने के लिए लगातार विभिन्न अनुसंधान-आधारित तकनीकों और प्रथाओं को लागू कर रहे हैं।

श्री रोहित पवार, सीईओ, बारामती एग्रो और आईएसएमए (ISMA) के अध्यक्ष ने अपनी कंपनियों के विविध कृषि-आधारित समूह पर परीक्षण शुरू करने का विचार किया है, जहां वे दो चीनी मिलों के मालिक हैं।

ChiniMandi.com के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं चीनी उत्पादन के लिए चुकंदर की खेती की पद्धति को बढ़ावा देने के लिए उत्सुक हूं क्योंकि यह दोनों, मिलर्स और किसानों को मुनाफा प्रदान करेगा। चुकंदर को कम अवधि वाली फसल के रूप में जाना जाता है और गन्ने की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। चुकंदर की फसल 2 से 3 महीने तक पेराई के मौसम को बढ़ाएगी और चीनी उद्योग को मजबूत करने में सहायता करेगी और किसानों के लिए लाभकारी भी साबित होगी।”

उन्होंने इस पर कहा की शरद पवार जी हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं क्यूंकि उन्हें भी लगता है की चीनी मिलों और गन्ना किसानों को इससे फायदा होगा।

“चुकंदर की खेती से मिलरों को भी मदद मिलेगी जहां क्षमता का उपयोग कम है, और ओवरहेड्स उच्च हैं। गन्ने की पेराई के बाद, यहां की मिलें बीट के लिए जा सकती हैं, जिससे उनकी क्षमता उपयोग में सुधार होगा। गन्ने के साथ एक फीडस्टॉक के रूप में बीट का उपयोग करने की उम्मीद करने वाली मिलों को केवल एक अतिरिक्त डिफ्यूज़र की आवश्यकता हो सकती है, बाकी उपकरणों के समान होने की आवश्यकता होती है।”

चंडीगढ़ स्थित राणा शुगर्स लिमिटेड के अग्रणी प्रयासों को देखकर, पावर प्रसन्न हैं और महाराष्ट्र में चुकंदर की खेती को लागू करने और प्रोत्साहित करने के लिए तत्पर हैं।

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