नेपाल: चीनी मिलों के धीमे बकाया भुगतान से किसान संतुष्ट नहीं

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काठमांडू: गन्ना किसानों का कहना है कि वे जानना चाहते हैं कि प्रत्येक किसान को कितना भुगतान किया गया है। चीनी मिलों द्वारा काफी धीमी गति से भुगतान किया जा रहा है, जिससे किसान संतुष्ट नही है। 28 दिसंबर को गन्ना किसानों का आंदोलन खत्म होने के एक दिन बाद काठमांडू में दिल का दौरा पड़ने से 72 वर्षीय किसान नारायण की मौत हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अब उनके बेटे सिया राम राय यादव को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। यादव परिवार अपनी पाँच बीघा (1.2 हेक्टेयर) भूमि पर उगने वाले गन्ने को अन्नपूर्णा चीनी मिलों को वर्षों से क्रेडिट पर बेच रहा था, लेकिन चूंकि चीनी मिल ने उन्हें समय पर भुगतान नहीं किया, इसलिए नारायण को परिवार के खर्च के लिए पैसे उधार लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सिया राम ने कहा, मेरे पास अब कुछ नहीं बचा है। हम बैंक के ऋण को खाली करने के लिए भूमि का एक टुकड़ा बेचने की योजना बना रहे हैं।

उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव और प्रवक्ता नारायण रेगमी ने कहा, उनके पास मौजूद रिकॉर्ड के आधार पर, चीनी मिलों ने किसानों को 85 प्रतिशत बकाया भुगतान किया है। अभी भी 15 प्रतिशत शेष है। चीनी मिलें धीरे-धीरे भुगतान कर रही हैं और मुझे उम्मीद है कि वे यह सब भुगतान कर देंगी। लेकिन गन्ना किसान सरकार इस दावे का खंडन करते हैं। गन्ना किसान संघर्ष समिति के संरक्षक राकेश मिश्रा ने कहा कि, किसानों को अभी तक उनका भुगतान नहीं मिला है। मिश्रा ने कहा कि, चीनी मिलों ने यह भी स्पष्ट रूप से नहीं बताया है कि वे वास्तव में कितना बकाया हैं। जबकि किसानों का दावा है कि, विभिन्न चीनी मिलों का उन पर कुल ९०० करोड़ रुपये बकाया है, सरकार और मिलों का कहना है कि उनका ६५० करोड़ रुपये बकाया है।

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