बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों की जगह अब शुरू होंगे नए उद्योग

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भागलपूर: बिहार में अब तक बंद पड़ी चीनी मिल की 2200 एकड़ जमीन बिकने के बजाय उद्योगों के लिये लीज पर दी जाएगी। गन्ना विकास मंत्री बीमा भारती ने संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दे दी। उन्होंने कहा कि, कैबिनेट के संशोधन प्रस्ताव में बिक्री की जगह लीज शब्द जोड़ने का निर्णय लिया गया है। 12 चीनी मिलों की जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र बसाने की योजना अंतिम चरण में है।

बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) को 12 चीनी मिलों की 2200 एकड़ जमीन दी जाएगी, जिससे वो निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास करेंगे। इसमें सर्वाधिक जमीन मुजफ्फरपुर जिले की मोतीपुर चीन मिल के पास है। इसका क्षेत्रफल करीब 900 एकड़ है।बिहार राज्य चीनी निगम की 8 इकाइयों यथा लोहट, हथुआ (डिस्टलरी), बनमंखी, वारिसलीगंज, सीवान, न्यू सावन, गोरौल और गुरारू है। वहीं सकरी, सुगौली, मोतीपुर और बिहटा चीनी मिल के साथ फार्म लैंड भी है।

चीनी मिलों पर किसानों के बकाया राशि के भुगतान में तेजी आयी है। गोपालगंज के सासामुसा और सीतामढ़ी की रीगा चीनी मिलों को समय पर भुगतान नहीं करने के कारण उनकी चीनी के स्टॉक को कब्जे में लेकर उनकी बिक्री की राशि किसानों को दी जा रही है। वैसे राज्य की चालू 11 चीनी मिल के पास अभी किसानों का 335 करोड़ रुपए बकाया है। दिसंबर में किसानों को सभी बकाया राशि भुगतान का लक्ष्य है।

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