कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री से गन्ना किसानों ने वित्तीय संकट से निपटने में मदद करने का आग्रह किया

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मैसूर : राज्य गन्ना किसान संघ ने नए मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से किसानों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने और उन्हें वित्तीय संकट से निपटने में मदद करने का आग्रह किया है। संघ के अध्यक्ष कुरबुर शांता कुमार ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि, शुगर कंट्रोल एक्ट 1966 के अनुसार, चीनी मिलों को किसानों से फसल खरीदने के 14 दिनों के भीतर भुगतान पूरा करना होता है। लेकिन सरकार ने अभी तक ‘SAP’ की घोषणा नहीं की है और इसलिए किसान संकट में हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि, केंद्र सरकार ने 2020-21 के लिए केवल उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) को 10 रुपये प्रति टन बढ़ाकर 2,850 रुपये प्रति टन कर दिया है, जिसमें किसानों की फसल की लागत भी कवर नहीं हो पाती है, जबकि सरकार ने दावा किया था कि, 2022 तक किसानों की आय दोगुनी की जाएगी।

गन्ने की खेती की लागत में वृद्धि पर बात करते हुए शांता कुमार ने कहा कि, केंद्र द्वारा पूर्व में घोषित FRP खेती की लागत को पूरा नहीं करती। गन्ना लागत लगभग 3,200 से 3,500 रुपये प्रति टन तक होती है, जिसके मुकाबले 2020-21 के लिए FRP 2,850 रुपये प्रति टन थी। शांता कुमार ने नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री बोम्मई से गन्ने के लिए SAP की घोषणा करने का आग्रह किया। एसोसिएशन ने मांग की कि, गन्ने को खेतों से मिलों तक ले जाने का खर्च मिलों को वहन करना चाहिए।

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