चीनी उद्योग में पहले जैसा लाभ नहीं रहा : नितिन गडकरी

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नयी दिल्ली, 5 जुलाई: केन्द्र सरकार चीनी मिलों को वित्तीय मजबूती दिलाने के साथ गन्ना किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया तैयार करने के लिए पैरवी कर रही है। गन्ना से गुड और चीनी के कारखाने तकरीबन हर गन्ना उत्पादक जिलों में चल रहे है। लेकिन किसानों और चीनी मिलों के लिए आर्थिक लाभ की दिशा में काम करने के लिए सरकार ने गन्ने के रस से एथॉल बनाने पर जोर देना शुरु किया है। इसी क्रम में गुरुवार को लोकसभा सदस्यों से केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गन्ने के बाई प्रोडक्टस के सदुपयोग करने की पहल करते हुए एथनॉल बनाने की अपील की। गडकरी ने अपने चीनी मिल के अनुभवों के बारे में बोलते हुए सदन के सदस्यों से कहा कि आप लोग शक्कर कारखाना खोलने की जगह गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने का काम करेंगे तो ज्यादा फायदा होगा।

दरअसल गडकरी लघु और मध्यम उद्योगों की भूमिका से जुडे मामले पर अपना वक्तव्य दे रहे थे तो उसी दौरान एक सांसद ने महाराष्ट्र में गन्ना किसानों से संबंधित विषय को पूरक प्रश्न के तौर पर उठाया। तो गडकरी ने कहा कि मै खुद चीनी उद्योग की बारिकियां समझता हू मेरा मामना है कि चीनी मिल लगाने से ज्यादा बेहतर होगा आप एथनॉल का कारखाना लगाएं।

गडकरी ने कहा कि महाराष्ट्र में चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इस उद्योग में पहले जैसा लाभ नहीं रहा। आप आर्थिक लाभ के लिए चीनी मिल लगा रहे है तो मेरा मानना है आप ऐसा करने के बजाय एथनॉल प्लांट लगाएं और आर्थिक लाभ कमाएं इसमें सरकार की तरफ से आपको मदद भी मिलेगी।

गडकरी ने कहा कि गन्ने के रस से तैयार एथेनॉल को पेट्रोलियम मंत्रालय 60 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदता है। ये सीधा सीधा लाभ का व्यवसाय है। गडकरी ने कहा कि इससे एक ओर जहां गन्ने के बाई प्रोडक्ट्स का सदुपयोग होगा वहीं चीनी मिलों पर गन्ना पैराई का दबाव कम होने के साथ गन्ने से चीनी बनाने के अलावा अन्य उत्पाद तैयार करने के विकल्प भी सामने होगें। गडकरी ने कहा कि गन्ने के रस से एथनॉल निर्माण का काम किसान, उद्यमी और जनता के लिए जितना लाभकारी है उतना ही पर्यावरण के लिए भी हितकारी है। इससे डीजल और पैट्रोल की कमी तो पूरी होगी ही देश में पैट्रोल आयात की निर्भरता भी कम होगी।

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