उत्तर भारतीय चीनी मिलों को अतिरिक्त निर्यात कोटा पाने की उम्मीद

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लखनऊ / पुणे : चीनी मंडी

अधिशेष चीनी और सरकार द्वारा मासिक कोटे के आधार पर सीमित घरेलू चीनी बिक्री के कारण उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें निर्यात को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसलिए उत्तर भारतीय चीनी मिलें सरकार द्वारा अतिरिक्त निर्यात कोटा पाने की उम्मीद कर रही हैं।

भारत सरकार ने देश में अधिशेष चीनी से निपटने में मदद करने के लिए सीजन 2019-20 के दौरान 60 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है।

हालही में केंद्र सरकार ने मिलों से वास्तविक निर्यात के आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके बाद, सरकार चीनी मिलों को कोटा का पुन: आवंटन कर सकती है उन्हें जो निर्यात के लिए अधिक कोटा की मांग करेंगे या जिन्होंने पहले से ही आवंटित कोटा में से अधिकांश का निर्यात किया है। खबरों के मुताबिक, अधिकारियों ने निर्यात कोटे के पुन: आवंटन के लिए एक फार्मूला पर काम करना शुरू कर दिया है।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के अध्यक्ष और बिहार के हरिनगर शुगर मिल्स के निदेशक विवेक पिट्टी ने कहा, उत्तर भारत की कई चीनी मिलें अधिक निर्यात कोटा पाने के लिए उम्मीद कर रही होंगी। मेरी खुद की मिलों ने निर्यात कोटा का 95% अनुबंध किया है, और अधिक चीनी निर्यात करना चाहते हैं क्योंकि हमारे पास अधिशेष चीनी हैं। अधिक चीनी की समस्या के कारण हम जितनी जल्दी हो सके अधिशेष कम करना चाहेंगे। अगर हम चीनी को अधिक समय तक स्टोर करते हैं और बाद में चीनी की गुणवत्ता बिगड़ने पर इसे डिस्काउंट पर बेचना पड़ता है।

अगर बात महाराष्ट्र की करे तो खबरों के मुताबिक, महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने राज्य के 18 लाख टन लगभग कोटा में से 5 लाख टन के आस-पास चीनी के लिए अनुबंध किया है, जबकि उत्तर प्रदेश के चीनी मिलों ने लगभग 22 लाख टन के अपने कोटा से 15 लाख टन से 18 लाख टन के बीच चीनी के निर्यात के लिए अनुबंध किया है। पिछले सीजन के निर्यात के लिए केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी राशि के भुगतान में देरी कई कारणों में से एक है जिसके वजह से महाराष्ट्र की चीनी मिलें निर्यात में तेजी नहीं ला पाई है।

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