सूखे से प्रभावित चीनी मिलों में होगी छंटनी

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औरंगाबाद : चीनी मंडी

मराठवाड़ा में चीनी मिलों ने किसानों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है और गन्ने की कमी के कारण अनिश्चित पेराई सत्र की उम्मीद में कर्मचारियों की छंटनी शुरू हुई है। चीनी आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि, गन्ना पेराई शुरू करने वाली मिलों की संख्या का अंतिम आंकड़ा अगस्त के पहले सप्ताह तक पता चल जाएगा। वेस्ट इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (विस्मा) के अध्यक्ष बी.बी.थोम्बरे का मानना है कि, इस साल नवंबर में मराठवाड़ा क्षेत्र की 47 मिलों में से केवल 10 मिलें ही पेराई शुरू कर पाएंगी।

पिछले साल खराब मानसून के कारण इस साल गन्ने की खेती में भारी कमी आई है। चीनी आयुक्त और महाराष्ट्र राज्य सहकारी चीनी फैक्ट्री फेडरेशन ने कहा है कि, इस साल गन्ने की खेती के क्षेत्र में 30 प्रतिशत तक गिरावट आई है, जो पिछले साल 11 हेक्टेयर की तुलना में लगभग 8 लाख हेक्टेयर है। मराठवाड़ा, सोलापुर और अहमदनगर में चीनी क्षेत्र के लिए एक चुनौती बन गई है। नतीजतन, राज्य का चीनी उत्पादन इस साल रिकॉर्ड 107 लाख टन के मुकाबले 64 लाख टन रहने का अनुमान है। और साथ ही साथ सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारे के रूप में गन्ने का उपयोग किया जा रहा है।

पेराई सत्र शुरू नहीं करने का फैसला करने वाली मिलों ने गन्ना कमी की बात कही है। थोम्बरे, उस्मानाबाद और यवतमाल में दो मिलों का संचालन करते हैं, उन्होंने कहा कि, वे इस वर्ष उस्मानाबाद इकाई का संचालन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, हमने पहले से ही किसानों, श्रमिकों और अन्य लोगों को इसकी सूचना दी है। उन्होंने कहा कि, औरंगाबाद, नांदेड़, परभणी, लातूर, बीड और उस्मानाबाद में कुछ ही मिलें परिचालन शुरू कर पाएंगी।

चीनी की कम खपत और कम कीमतों से चीनी सेक्टर में गिरावट जारी है और उत्पादन में संभावित गिरावट कीमतों को बढ़ावा देने में अभी तक तो विफल रही है। वित्तीय स्थिति में सुधार करने के लिए, चीनी मिलों ने अपने पुराने स्टॉक को इथेनॉल में बदलने के लिए सरकार से अनुमति मांगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में, महाराष्ट्र राज्य सहकारी चीनी फैक्ट्रीज़ फेडरेशन के अध्यक्ष, जयप्रकाश दांडेगांवकर ने कहा है कि, इस साल चीनी क्षेत्र में चल रहे गन्ने के कारण 30-40 करोड़ लीटर इथेनॉल की कमी देखने की उम्मीद है। यदि मिलों को अपने पुराने चीनी स्टॉक को इथेनॉल उत्पादन में शामिल करने की अनुमति दी जाती है, तो अधिशेष की समस्या कम हो सकती है। महाराष्ट्र मिलर्स औसतन प्रति वर्ष 110 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन करते हैं।

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