देश में पेराई सत्र 2020-21 अंतिम चरण में; मात्र 7 चीनी मिलें शुरू

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नई दिल्ली: इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में चीनी मिलों ने 1 अक्टूबर 2020 से 31 मई 2021 के बीच 305.68 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। यह पिछलें सीजन में उत्पादित 270.05 लाख टन से 35.63 लाख टन अधिक है। पिछले साल 31 मई 2020 तक गन्ने की पेराई करने वाली 18 चीनी मिलों की तुलना में, इस साल 31 मई 2021 तक केवल 7 चीनी मिलें मुख्य रूप से दो राज्यों यानी यूपी और तमिलनाडु में गन्ने की पेराई कर रही हैं।

उत्तर प्रदेश में 110.16 लाख टन चीनी का उत्पादन…

उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों ने 31 मई, 2021 तक 110.16 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जो पिछले साल इसी तारीख को उनके द्वारा उत्पादित 125.46 लाख टन की तुलना में 15.30 लाख टन कम है। इस वर्ष संचालित होने वाली 120 मिलों में से 116 मिलों ने अपनी पेराई समाप्त कर दी है और केवल 4 मिलों ने अपना परिचालन जारी रखा है, जबकि पिछले वर्ष इसी तारीख को 14 मिलें पेराई कर रही थी। राज्य के पश्चिमी क्षेत्र में वर्तमान पेराई सत्र कुछ दिनों के लिए लंबा हो गया क्योंकि अधिकांश गुड़ / खांडसारी इकाइयों ने लॉकडाउन प्रतिबंधों के कारण अपना परिचालन बंद कर दिया था, जिसके कारण किसानों ने अपना गन्ना पेराई के लिए मिलों को भेज दिया।

महाराष्ट्र में 106.28 लाख टन चीनी उत्पादन…

महाराष्ट्र में, पेराई सत्र समाप्त हो गया है और राज्य की 190 मिलों ने 106.28 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जो कि 2019-20 सीजन में उत्पादित 61.69 लाख टन की तुलना में लगभग 44.59 लाख टन अधिक है। इसी तरह, कर्नाटक में, सभी मिलों ने 15 अप्रैल, 2021 तक अपने पेराई कार्यों को बंद कर दिया था और पिछले वर्ष की समान अवधि में उत्पादित 33.80 लाख टन की तुलना में 41.67 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। हालांकि, दक्षिण कर्नाटक में कुछ मिलें इस महीने के अंत में विशेष सीजन के लिए अपना परिचालन शुरू करेंगी। पिछले साल विशेष सीजन के दौरान कर्नाटक की मिलों ने 1.14 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था।

आज की तारीख में, तमिलनाडु में, इस सीजन में संचालित 28 चीनी मिलों में से, 3 मिलें वर्तमान में विशेष सीजन के लिए चल रही हैं। 31 मई 2021 तक, राज्य में चीनी का उत्पादन 6.52 लाख टन हुआ है, जबकि पिछले साल इसी तारीख को 5.90 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। पिछले साल 31 मई 2020 तक 24 चीनी मिलों में से 4 मिलें शुरू थीं। पिछले साल जून-सितंबर की अवधि के दौरान विशेष सीजन के दौरान तमिलनाडु में मिलों द्वारा 2.0 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया था। गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा के शेष राज्यों ने भी चालू सीजन के लिए अपने पेराई कार्यों को पूरा कर लिया है और 31 मई, 2021 तक सामूहिक रूप से 41.05 लाख टन उत्पादन किया है।

अगले सीजन की फसल का जुलाई में प्रारंभिक अनुमान…

अगले सीजन 2021-22 में भी गन्ने की उपलब्धता और अधिक चीनी उत्पादन की बात चल रही है। जैसा कि प्रथा है, ISMA जून 2021 के उत्तरार्ध में देश भर में गन्ना क्षेत्र की उपग्रह छवियों को प्राप्त करेगा ताकि अगले साल कटाई के लिए उपलब्ध गन्ने के रकबे का अंदाजा लगाया जा सके। तदनुसार, इस्मा देश भर के सदस्यों की अपनी बैठक में इस पर चर्चा करेगा, और जुलाई, 2021 में चीनी सीजन 2021-22 के लिए गन्ने की उपलब्धता और चीनी उत्पादन का प्रारंभिक अनुमान लगाएगा।

चीनी निर्यात का बना रिकार्ड…

2020-21 के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 60 लाख टन चीनी के एमएईक्यू के मुकाबले चीनी के निर्यात के लिए लगभग 58 लाख टन अनुबंध पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं। यह भी अनुमान है कि जनवरी, 2021 से मई, 2021 के दौरान देश से लगभग 44-45 लाख टन चीनी का भौतिक रूप से निर्यात हुआ होगा।हाल ही में, सरकार ने मौजूदा वैश्विक बाजार परिदृश्य का हवाला देते हुए चीनी के निर्यात में अपनी सब्सिडी को 6000 प्रति टन से 4000 रुपये प्रति टन कर दिया है। कम की गई सब्सिडी उस चीनी निर्यत को लागु होगी, जिसके लिए 20 मई, 2021 को या उसके बाद निर्यात अनुबंधपर हस्ताक्षर किए गए हैं।

321.18 करोड़ लीटर इथेनॉल के लिए अनुबंध…

इथेनॉल के मोर्चे पर, 346.52 करोड़ लीटर की कुल एलओआई मात्रा के मुकाबले, 321.18 करोड़ लीटर के लिए अनुबंध किया गया है और 24 मई 2021 तक 145.38 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति की गई है। देश ने वर्तमान 2020-21 में अब तक औसतन 7.56% का सम्मिश्रण प्रतिशत हासिल किया है। जबकि राजस्थान, केरल, पश्चिम बंगाल, असम, पूर्वोत्तर राज्यों, कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर अधिकांश राज्यों में लगभग 8 – 10% सम्मिश्रण हासिल किया है।

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