जादा आपूर्ति, कम कीमत से चीनी कीमतों पर दबाव

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नई दिल्ली : चीनी मंडी

चीनी का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक भारत जल्द ही दुनिया के शीर्ष चीनी निर्माता ब्राजील के भी आगे निकलने की संभावना है। विश्लेषकों के मुताबिक, भारत चीनी उत्पादन में ‘नंबर वन’ का तमगा इस साल के चीनी सीजन में ही हासिल कर लेगा । पिछले साल, भारत ने 32.3 मिलियन टन चीनी का उत्पादन किया था और इस साल यह 33-35 मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है।

ब्राजील में चीनी की जगह इथेनॉल को प्राथमिकता…

ब्राजील में चीनी उत्पादन घटने का सबसे प्रमुख कारण है वहाँ की मिलों का इथेनॉल उत्पादन की तरफ बढ़ा हुआ रुझान, इसके अलावा, गन्ना क्षेत्र में हो  रहे कम निवेश ने भी ब्राजील में गन्ना पैदावार को प्रभावित किया है, जो 1990 से दुनिया में अग्रणी चीनी उत्पादक रहा है।  ब्राजील में इस साल चीनी का उत्पादन 10 लाख मेट्रिक टन घटकर 30 लाख मेट्रिक टन तक पहुंच सकता है। पिछले साल, ब्राजील का चीनी उत्पादन लगभग 40 लाख मेट्रिक टन था।

भारत में 2018 में चीनी उत्पादन 10 फीसदी बढ़ेगा…

आईसीआरए की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी ओर भारत में शुरुआती अनुमान बताते हैं कि 2018 में चीनी उत्पादन 10 फीसदी बढ़कर 35 लाख मेट्रिक टन हो सकता है और यह देश में मौजूदा चीनी अधिशेष में जोड़ देगा। घरेलू चीनी उद्योग अतिरिक्त आपूर्ति की स्थिति के साथ जुड़ा हुआ है, जो चीनी की कीमत की  स्थिरता को अनिश्चितता में बदलने की संभावना है। मांग में कमी और बकाया भुगतान में रूकावट के चलते देश का चीनी उद्योग आर्थिक संकट का सामना कर रहा था । इसके चलते  सरकार ने कुछ कड़े कदम उठाये, तो  मई में चीनी की कीमतें एक्स-गेट 32,500-33,000 रुपये प्रति मेट्रिक टन ( उत्तर प्रदेश) हो गई, जो उससे पहले 26,500 रुपये प्रति मेट्रिक टन थी, लेकिन चीनी की अत्याधिक आपूर्ती के चलते  कीमत में स्थिरता अनिश्चित है।

अधिशेष/ अतिरिक्त चीनी की समस्या…

प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, भारत में 2019  में चीनी उत्पादन 35 लाख मेट्रिक टन होने का अनुमान है  और घरेलू बाज़ार में चीनी खपत ध्यान में रखी जाए तो कम से कम 9 लाख मेट्रिक टन चीनी अधिक/ अतिरिक्त होने की संभावना है, जिससे बाजार में मौजूदा चीनी अधिशेष और बढ़ जायेगा । जादा अधिशेष का सीधा असर चीनी की कीमतों पर पड़ने की सम्भावना है । 2018  में लगभग साल दर साल (YoY) की तुलना में चीनी उत्पादन में 60 प्रतिशत उल्लेखनीय वृद्धि के परिणामस्वरूप  2 मिलियन टन निर्यात के सफल कार्यान्वयन अगर हो भी जाए फिर भी  देश के भीतर  9-9.5 लाख मेट्रिक टन के बीच स्टॉक अतिरिक्त रह सकता  है। हालांकि, वैश्विक बाजार में  चीनी की कीमतों में गिरावट के चलते, पूरे 2 मिलियन टन के निर्यात में रुकावटें आ सकती है।   सरकार के बकाया पैकेज की घोषणा के बाद चीनी कीमतों में कुछ सुधार देखने को मिला था।

अगले 12  महिनों में 2-4 मिलियन टन से अधिक चीनी खपत मुश्किल : मजूमदार

आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख सब्यासाची मजूमदार ने कहा, “आईसीआरए ने चीनी की लगातार बढ़ोतरी के परिदृश्य को देखते हुए कीमतों पर दबाव की उम्मीद की है।” भारत अपने चीनी अधिशेष को निर्यात करने के लिए संघर्ष कर रहा है क्योंकि विश्व बाजार में घरेलू बाजार से भी कम कीमत  पर चीनी बेचीं जा रही हैं। विश्लेषकों ने कहा कि, अतिरिक्त स्टॉक की वजह से विश्व बाजार में अगले 12 महीनों में 2-4 मिलियन टन से अधिक चीनी खपत मुश्किल है।

मजूमदार ने कहा, गन्ने की जादा  कीमतें किसानों को गन्ना फसल लेने के  लिए प्रोत्साहित करती हैं, जो चीनी आपूर्ति दबाव को और बढ़ा सकती है।इससे सरकारी समर्थन के बावजूद चीनी मिलों के लिए माहौल चुनौतीपूर्ण होगा। इसके अलावा राज्यों द्वारा तय की जानेवाली एसएपी से चीनी मिलों  का परिचालन, चीनी दर और किसानों का बकाया भुगतान इस सब पर असर दिखेगा।

भारत का चीनी निर्यात के लिए संघर्ष…

भारत अपने अधिशेष को निर्यात करने के लिए संघर्ष कर रहा है क्योंकि विश्व बाजार में कीमतें स्थानीय कीमतों पर भारी छूट पर व्यापार कर रही हैं। विश्लेषकों ने कहा कि, जादा चीनी स्टॉक की वजह से विश्व बाजार में अगले 12 महीनों में 2-4 मिलियन टन से अधिक चीनी की खपत करना भी मुश्किल होगा । घरेलू मूल्य निर्धारण परिदृश्य को समझाते हुए, मजूमदार ने कहा कि,  2019 में चीनी की अतिरिक्त आपूर्ति और कीमतों में दबाव के चलते मिलों की आय (राजस्व) पर दबाव पड़ सकता है,  इसके परिणामस्वरूप मार्जिन दबाव और गन्ना बकाया में वृद्धि की संभावना है। इसके अलावा, २०19 के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में 2.5 प्रतिशत की प्रभावी वृद्धि से कुछ राज्यों में सरकार द्वारा निर्धारित राज्य द्वारा सुझाए गए मूल्य (एसएपी) में वृद्धि भी हो सकती है।

SOURCEChiniMandi

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