पाकिस्तान में चीनी निर्यात पर प्रतिबंध का स्वागत, गन्ना उगाने पर रोक लगाने की मांग

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इस्लामाबाद: सरकार द्वारा चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगाये जाने तथा स्थानीय बाजार में इसकी कीमतें स्थिर करने के लिए चीनी आयात करने के फैसले का पाकिस्तान इकोनॉमी वॉच (पीईडब्ल्यू) ने स्वागत किया है। साथ ही, इसने चीनी और आटे की आसमान छूती कीमतों से जनता को लूटने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।

पीईडब्ल्यू के अध्यक्ष डॉ. मुर्तजा मुग़ल ने कहा कि इस मामले में कुछ मिलों के लाइसेंस रद्द करना, मामूली जुर्माने लगाना और कुछ अधिकारियों को निलंबित करना ही काफी नहीं। महंगाई, अनिश्चितता, कर्ज और आटा व चीनी माफिया की जुर्रत की वजह से आम जनता का जीवन दूभर हो गया। इस माफिया ने अरबों रुपये का अवैध मुनाफा कमाया ताकि किसानों और जनता को ठगने के लिए और अधिक मिलें खोल सकें। डॉ. मुर्तजा के अनुसार, चीनी सेक्टर को दुनियाभर में डूबता जहाज माना जाने लगा है लेकिन पाकिस्तान में इसे आम लोगों की कीमत पर अंजाम दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर गन्ने की खेती पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर स्थानीय खपत के लिए चीनी आयात की जाए, तो पानी की कमी से निपटा जा सकता है। आयात की गई चीनी कहीं अधिक सस्ती है। इससे सरकार सरप्लस चीनी निर्यात करने के लिए मिलों को देने वाला अरबों रुपया बचा सकेगी और किसानों को कपास उगाने के लिए प्रोत्साहित करके पाकिस्तान को पुनः एक प्रमुख कपास निर्यातक देश बनाया जा सकेगा। उन्होंने अपने निहित स्वार्थों के लिए देश के कॉटन बेल्ट में चीनी मिलों की स्थापना करके राष्ट्रीय हितों से समझौता करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी की।

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