बिजली बेचकर आर्थिक लाभ कमाएगी गोरखपुर की पिपराइच चीनी मिल

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गोरखपुर, 22 अगस्त: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में सहकारी चीनी मिलों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ आय के वैक्लपिक श्रोतों को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत योजनाओं के अमल पर ज़ोर दे रहे है। इसी क्रम में प्रदेश में चल रही सहकारी चीनी मिलो में कहीं पर गन्ने से एथनॉल बनाने पर काम किया जा रहा है तो कहीं पर बायोगैस बनाकर अतिरिक्त आय अर्जित करने के नवाचार हो रहे है।

सरकार की पहल से प्रेरित प्रदेश की कुछ सहकारी चीनी मिलें बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों के मध्यनजर खुद ही बिजली तैयार करने का काम कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री के गृह जिले गोरखपुर में स्थिति पिपराइच सहकारी चीनी मिल ने भी अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए टरबाइन यूनिट्स लगाने का काम शुरु कर रखा है, जो अपने अन्तिम चरण में है। जब यहाँ टरबाइन लग कर तैयार हो जाएँगें तो इनसे जो बिजली उत्पादित होगी, उससे चीनी मिल की बिजली सप्लाई होने के बाद शेष बची बिजली को पावर ग्रिड को बेच कर आमदनी अर्जित की जाएगी।

चीनी मील में चल रहे कार्य की प्रगति रिपोर्ट पर बोलते हुए उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी संघ के प्रबंध निदेशक बिमल कुमार दुबे ने कहा कि मंहगी होती बिजली की आपूर्ति को कम करने के लिए हम चीनी मिलों को सेल्फ़ डिपेंडेट बनाने का काम कर रहे है और इसी का परिणाम है कि पिपराइच चीनी मिल में ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए बिजली निर्माण का काम हो रहा है। दुबे ने कहा कि इस सत्र में यहाँ से बिजली आपूर्ति शुरु हो जाएगी। यहाँ से 27 मेघावाट बिजली बनेगी । इसमें तक़रीबन 7-8 मेघावाट बिजली चीनी मिल के उपयोग में आएगी और शेष बची बिजली पावर ग्रिड को बेच दी जाएगी। इससे चीनी मिल को बिजली के लिए अन्य माध्यमों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा और साथ ही कम ख़र्चे में यहाँ काम भी अच्छा होगा और चीनी मिल को अतिरिक्त आमदनी भी होगी।

पिपराइच चीनी मिल में बिजली निर्माण से किफ़ायती ऊर्जा उपयोग पर मीडिया से बात करते हुए गोरखपुर गन्ना उपायुक्त रामवृक्ष ने कहा कि मिल में गन्ने के बगास से बिजली पैदा करने का हमारा मक़सद पूरी तरह से पर्यावरण मानकों के अनुरूप है। इससे पर्यावरण संरक्षण मे जहाँ मदद मिलेगी वहीं इको फ्रेंडली वातावरण में काम करने से कर्मचारियों की कार्य दक्षता भी बढ़ेगी। रामवृक्ष ने कहा कि कोयले से बिजली बनाने में प्रदूषण बढ़ता है जबकि इसमें जीवाश्म ईंधन के प्रयोग होने से प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

चीनी मिल में काम करने वाले कर्मचारी देवनारायण ने कहा कि जब मिल में बिजली ज्यादा बनेगी तो गन्ना पैराई के काम में भी तेज़ी आएगी इससे किसानों को गन्ना पैराई के लिए इन्तज़ार नहीं करना होगा और साथ ही चीनी मिल में खुद की बिजली बनने से बार बार बिजली गुल होने की समस्या से भी निजात मिलेगी। वहीं मिल की आर्थिक स्थिति में सुधार होने से कर्मचारियों को समय पर वेतन भी मिलेगा।

ग़ौरतलब है कि पिपराइच चीनी मिल की उपयोगिता और काम के दबाव को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस चीनी मिल में विद्युत उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी की घोषणा की थी, उसी के कारण इसमें 27 मेगावाट बिजली का भी उत्पादन का काम शुरु किया गया था, जो जल्द ही पूरा होने वाला है।

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