प्रधान मंत्री मोदी का टार्गेट : इथेनॉल उत्पादन बढाकर १२००० करोड़ रुपये बचाएंगे

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, जैव ईंधन के जादा से जादा इस्तेमाल कच्चे तेल आयात निर्भरता को कम करने में मदद कर सकता है। उसेक साथ ही किसानों के लिए अतिरिक्त आय उत्पन्न कर सकते हैं और ग्रामीण नौकरियां पैदा कर सकते हैं। प्रधान मंत्री मोदी ने, चार वर्षों में इथेनॉल उत्पादन को तीन गुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया। इसके बाद तेल आयात में खर्च होनेवाले देश के 12,000 करोड़ रुपये बच जाएंगे. विश्व जैव ईंधन दिवस को चिह्नित करने के लिए यहां एक समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश में 12 जैव-रिफाइनरियों की स्थापना में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है जो फसल के स्टबल और अवशेषों के साथ-साथ शहरी कचरे से ईंधन का उत्पादन करेंगे। गन्ना और फसल अवशेष से उत्पन्न ईंधन न केवल किसानों को अतिरिक्त आय देगा, बल्कि फसल के सुरक्षित निपटान से पर्यावरण की भी मदद करता है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है, हम 81 प्रतिशत तेल आयात करते है. जैव ईंधन का उत्पादन बढ़ाने के बाद देश की आयात निर्भरता
कम होगी और हमारा करोडो रुपया बच जाएगा। भारत ने 2002 में पहली एनडीए शासन के दौरान पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण करना शुरू किया था। लेकिन उसके बाद कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए के 10 साल के शासनकाल में इस की रफ्तार बहुत धिमी हो गयी।

२०१७-१८ में १४१ करोड़ लीटर इथेनॉल उत्पादन

मोदी ने कहा कि, 2014 में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए फिर से सत्ता में आने पर पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण करने के कार्यक्रम को पुनर्जीवित किया गया । “केंद्र के प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2017-18 में अनुमानित 141 करोड़ लीटर इथेनोल का उत्पादन किया गया, इससे तेल आयात के लिए खर्च होनेवाले करीब 4,000 करोड़ रुपये बचाए है। उन्होंने कहा कि चार साल में 450 करोड़ लीटर का लक्ष्य रखा गया है, इससे तेल के आयात पर खर्च होनेवाले 12,000 करोड़ रुपये बचाए जाएंगे। 2017-18 में कच्चे तेल के आयात पर भारत ने लगभग 88 बिलियन अमरीकी डालर (करीब 5.9 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए। हमारा लक्ष्य पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण को 2022 तक 10 प्रतिशत और 2030 तक 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का है।” वर्तमान में, पेट्रोल में इथेनॉल का 3.8 प्रतिशत होता है। जैव-रिफाइनरियां स्थापित होने से उसमे लगभग 1.5 लाख नौकरियां पैदा होने का दावा भी मोदीजी ने किया है ।

स्वास्थ्य और पर्यावरण में भी सुधार

पर्यावरण के अनुकूल ईंधन का उपयोग करने पर सरकार के उपायों का वर्णन करते हुए, उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में पुनर्नवीनीकरण प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है, जबकि सौर पैनलों से उत्पन्न बिजली को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा, एलईडी बल्ब रेलवे और बंदरगाहों में पारंपरिक प्रकाश व्यवस्था की जगह ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े सालों में गरीब महिला परिवारों को 5 करोड़ रुपये के खाना पकाने गैस एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं ताकि उन्हें धुवेंवाले रसोईघर छुटकारा मिल सके, जिससे उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण में भी सुधार हो सके।

एमएसपी और एफआरपी भी बढाई

सरकार ने 14 खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य याने एमएसपी बढ़ाया है, जो उत्पादन की लागत से 50 प्रतिशत अधिक दर देने का वादा पूरा करता है। उन्होंने कहा कि, प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन ने हाल के एक लेख में कृषि आय को बढ़ावा देने के लिए सरकार के कदमों की सराहना की है। इसके अलावा, 2018-19 फसल वर्ष के लिए गन्ना के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 20 रुपये बढ़ाकर 275 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है और अब यह लागत पर 80 फीसदी लाभ देता है। उन्होंने कहा, “इस बढ़ी हुई दर से करोड़ों किसानों को फायदा होगा।”

गरीब, जनजातीय आबादी और किसानों के लिए किया काम

प्रधान मंत्री ने कहा कि जन धन, वान धन और गोबर धन जैसी योजनाएं गरीबों, जनजातीय आबादी और किसानों के जीवन को बदलने में मदद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जैव ईंधन की परिवर्तनीय क्षमता केवल छात्रों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और लोगों की भागीदारी के माध्यम से महसूस की जा सकती है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जैव ईंधन के लाभ लेने में मदद करने के लिए उपस्थित सभी को आग्रह किया। प्रधान मंत्री ने ‘जैव ईंधन 2018’ पर राष्ट्रीय नीति पर एक पुस्तिका भी जारी की। उन्होंने परियोजनाओं की त्वरित पर्यावरण मंजूरी के लिए एक वेब पोर्टल, इंटरेक्टिव एंड वर्चुअल एनवायरनमेंटल सिंगल-विंडो हब (PARIVESH) द्वारा ‘प्रोएक्टिव एंड उत्तरदायी सुविधा’ लॉन्च किया।

SOURCEChiniMandi

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