सरकार और चीनी मिल के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की चेतावनी

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रुड़की: उत्तराखंड के हजारों गन्ना किसान बकाया भुगतान को लेकर फिर एक बार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे है, क्योंकि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी 30 सितंबर तक इकबालपुर चीनी मिल भुगतान में विफ़ल रही है। उत्तराखंड किसान मोर्चा ने सरकार और मिल प्रशासन पर गैर जिम्मेदाराना रवैय्ये का आरोप लगाया। किसानों ने सरकार और मिल के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है, अब किसान आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।

उत्तराखंड किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड ने कहा कि, इकबालपुर चीनी मिल पर किसानों के दो साल का बकाया भुगतान है। बकाया भुगतान मुद्दा सुलझाने के लिए 12 सितंबर को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बैठक बुलाई थी। बैठक में तय हुआ कि पेराई सत्र 2017-18 का बकाया 72 करोड़ रुपये का भुगतान 30 सितंबर तक कर देगी, लेकिन मिल प्रबंधन भुगतना करने में विफ़ल रहा।

इकबालपुर चीनी मिल की हालत काफी ख़राब हो चुकी है। मिल आर्थिक तंगी से जूझ रही है जिसके कारण उसने अब तक गन्ना किसानों का बकाया भुगतान नहीं चुकाया है। चीनी मिल को हालही में एक बड़ा झटका मिला हथा, जिससे मिल की हालत अब और ख़राब होने वाली है क्यूंकि 38 गांव के किसानों ने साफ तौर पर ऐलान कर दिया है कि इस बार इकबालपुर चीनी मिल को किसी भी सूरत में गन्ने की आपूर्ति नहीं की जाएगी। जिससे कारण ऐसा लग रहा है की मिल अपना पेराई सत्र शुरू नहीं कर पाएगी।

चीनी मिल क्षेत्र के गन्ना किसान बौखलाए हुए है, क्यूंकि उन्हें अब तक मिल द्वारा गन्ना बकाया भुगतान नहीं चुकाया गया है। मिल की इतनी हालत ख़राब है की उनकी नीलामी की चीनी भी नहीं बिक रही है। चीनी मिल की ओर से दो साल से गन्ना किसानों का भुगतान नहीं किया गया है। बकाया को लेकर किसानों ने कई बार आंदोलन किया, फिर भी उन्हें भुगतान करने में चीनी मिल प्रशासन विफ़ल रहा है।

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