पंजाब सरकार चीनी मिलों के लिए आमदनी के अतिरिक्त श्रोत तलाशने के विकल्पों को दे रही है प्रोत्साहन

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चंडीगढ़, 9 अक्टूबर: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के नेतृत्व मे सूबे की सरकार गन्ना किसानों और चीनी मिलों को समानान्तर सहयोग कर आर्थिक तरक़्क़ी के लिए प्रेरित कर रही है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पुरानी और बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरु किया गया है। चीनी मिलों में एथनॉल उत्पादन इकाई लगाने के साथ साथ बिजली संयंत्र लगाकर आर्थिक लाभ कमाने के लिए मिलों को प्रेरित किया जा रहा है।

प्रदेश के सहकारिता मंत्री सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए कहा कि सूबे की चीनी मिलों को विद्युत संयंत्र लगाने के लिए सरकार वित्तीय सहयोग दे रही है, साथ ही तैयार बिजली को ख़रीदने के लिए भी ऑफ़र दे रही है। चीनी मिलें अपने यहाँ बिजली की आपूर्ति उपयोग करने के बाद शेष बची बिजली सरकारी विद्युत उपक्रम पीएसपीसीएल को बेच सकती है। इसके लिए चीनी मिलों को वाजिब दाम दिए जाएँगे। मंत्री ने कहा कि ऐसा करने से चीनी मिलों को अतिरिक्त आमदनी होगी और वे गन्ना बकाया जैसी समस्याओं के वक़्त किसानों को समय पर बकाया चुका सकेंगे।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों में एथनॉल बनाने और बिजली पैदा करने के संयंत्र लगाए जा रहे है। इसी क्रम में हाल ही में हमने भोगपुर चीनी मील का कायाकल्प करने के लिए 108 करोड़ रुपये का बजट बनाकर मिल की कार्यक्षमता में इज़ाफ़ा किया है वहीं बिजली निर्माण के लिए एक बिजली सह उत्पादन संयंत्र लगाने का काम भी किया है। इस संयंत्र से 15 मेघावाट बिजली बनेगी। इस बिजली को जहाँ चीनी मिल में उपयोग में लिया जा सकेगा वहीं शेष बची बिजली को सरकारी कम्पनी पीएसपीसीएल को बेचा जा सकेगा।

मंत्री रंधावा ने कहा कि अगर ये चीनी मिल रेगुलर बिजली बनाएगी तो गन्ना पैराई के दौरान हर साल मिल को तक़रीबन 25 से 30 करोड़ की आदमी होगी। इस चीनी मिल के इलाक़े में गन्ना की खेती काफ़ी तादाद में होती है तक़रीबन 13 हज़ार हैक्टेयर भूमि पर गन्ना की खेती होती है। ऐसे में यहाँ पैराई के लिये गन्ना लेकर आने वाले किसानों को समय पर गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित करने में चीनी मिल में उत्पादित की जाने वाली बिजली से होने वाली आय महत्वपूर्ण सहयोगी साबित होगी। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में ऐसी कई चीनी मिलें है जो हज़ारों किसानों की आजीविका से जुड़ी रहती है। हज़ारों कामगारों का भविष्य जुड़ा होता है। इन मिलों पर किसान सीज़न में गन्ना पैराई के लिये लेकर आते है लेकिन उनको पैसा समय पर नहीं मिलता। किसानों को समय पर उनका बकाया तब ही मिल सकता है जब चीनी मिलों के पास आमदनी के अतिरिक्त श्रोत हो और तब ही हो सकता है जब चीनी के साथ साथ मिलें या तो एथनॉल का निर्माण करे या बिजली उत्पादित करे। मंत्री ने कहा कि सरकार ये तय कर रही है कि प्रत्येक सहकारी चीनी मिल में या तो एथनॉल संयंत्र या बिजली संयंत्र लगाया जाए ताकि चीनी मिलों को अतिरिक्त आमदनी के विकल्प तैयार कर आर्थिक रूप से सशक्त और मज़बूत बनाया जा सके।

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