गन्ने में सुक्रोज कम होने से चीनी की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ेगा असर

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नई दिल्ली, 07 जनवरी: देश में चीनी मिलों का गन्ना पैराई सत्र चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार चालू पैराई सत्र में एक ओर जहां चीनी उत्पादन घटने की खबरें सामने आ रही है वहीं कई राज्यों में गन्ने में प्रति क्विंटल के हिसाब से सुक्रोज की मात्रा में भी औसत कमी देखने को मिल रही है। भारतीय चीनी मिल संघ के उपाध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जिन राज्यों में गन्ना की खेती बाढ़ से प्रभावित हुई है या सूखा की वजह से गन्ने की रोपाई देरी से हुई वहाँ पर ये स्थिति देखने को मिली है। यहाँ मिलों में प्रति हैक्टेयर में जितना गन्ना मिल तक पहुँच रहा है उस अनुपात में गन्ने से चीनी का उत्पादन कम हो रहा है। ये स्थिति गन्ने में बाढ़ के कारण तने का झुकाव होने से उसमें रस कम बनने के कारण हुई है।

शिरगांवकर से कर्नाटक और महाराष्ट्र के मसले पर हमने बात की तो उन्होंने कहा कि देश के अग्रणी गन्ना उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में गन्ने में शुक्रोज कम होने से पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस साल चीनी की औसत रिकवरी 0.5 फ़ीसदी कम पायी गयी है। जबकि पिछले साल यह आँकड़ा 10.5 फ़ीसदी था जो इस साल घट कर 10 फ़ीसदी रह गया है। यहां चीनी उत्पादन घटने के साथ साथ गन्ने में शुक्रोज की मात्रा में औसत कमी पाया जाना चिन्ताजनक है। इससे बाज़ार पर भी असर पड़ेगा।

शिरगांवकर ने कहा कि यही हाल दक्षिण भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य कर्नाटक का भी है। यहाँ भी बाढ़ के कारण गन्ने में अपेक्षित शुक्रोज नहीं बना। इस समस्या से चीनी मिलों में गन्ना की प्रति क्विंटल के लिहाज़ से पैराई सत्र में जितनी आवक हो रही है उतनी चीनी नहीं बन रही।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक (कॉमर्शियल क्रॉप ) डॉ. आर के सिंह ने कहा कि वर्तमान में जो स्थितियाँ चल रही है उनके अनुसार चीनी उत्पादन घटने के साथ चीनी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। इन राज्यों में सूखा या बाढ़ से प्रभावित गन्ने की फसलों में शुगर की मात्रा घटने के साथ उसके मिठास में भी कमी आने की संभावना है। इससे बाज़ार में चीनी की ग्रेड और गुणवत्ता श्रेणी में अन्तर आने की संभावना है।

महाराष्‍ट्र में 137 चीनी मिलें परिचालन में हैं और उन्‍होंने 31 दिसंबर तक 16.50 लाख टन चीनी का उत्‍पादन किया है। पिछले साल समान अवधि में यहां 187 मिलें चालू थी और उन्‍होंने कुल 44.57 लाख टन चीनी का उत्‍पादन किया था। कर्नाटक में 63 चीनी मिलों ने 31 दिसंबर, 2019 तक 16.33 लाख टन चीनी का उत्‍पादन किया है, इसके विपरीत पिछले साल समान अवधि में यहां 65 चीनी मिलों ने 21.03 लाख टन चीनी का उत्‍पादन किया था।

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