चीनी मिलों द्वारा पेराई के लिए हार्वेस्टर के विकल्प पर सोच विचार

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सोलापुर : कोरोना वायरस महामारी के चलते गन्ना कटाई मजदूरों ने अपने गांवों की तरफ पलायन किया है। अब अगले पेराई सीजन में मजदूरों की संभाव्य कमी को देखते हुए, मिलर्स अभी से हार्वेस्टर के विकल्प पर सोचविचार कर रहें है। राज्य के सोलापुर में बड़ी तादाद में चीनी मिलें है। सूखे स्थिति और चीनी की गिरती कीमतों के कारण मिलें पहले से ही कठिनाईयों का सामना कर रही है, और अब कोरोना वायरस महामारी के रूप में मिलों को नए संकट का सामना करना पड़ रहा है। पिछलें पेराई सत्र में गन्ने की काफी कमी थी, लेकिन अब गन्ने का रकबा बढ़ गया है। कोरोना वायरस के कारण कटाई मजदूर आएंगे या नही ? इस बात का डर बना हुआ है। इसीलिए मिलर्स ने मजदूरों के साथ साथ हार्वेस्टर का विकल्प चुना है।

सोलापुर जिले के 11 तालुका में कुल 38 निजी और सहकारी चीनी मिलें है। इनमें से 30 – 32 मिलें अगले पेराई सीजन में हिस्सा ले सकती है। आम तौर पर अक्टूबर और नवम्बर के बीच में पेराई सीजन शुरू होता है। अगले तीन माह को चीनी मिलों के लिए काफी अहम माना जाता है। इस अवधि के दौरान में गन्ने की कटाई और परिवहन प्रणालियों को अनुबंधित किया जाता है, और मिल की मरम्मत की जाती है। वर्तमान में, मिलों में मरम्मत का काम जोरों पर है। हालांकि, गन्ना कटाई के अनुबंध को मजदूरों द्वारा मिलर्स को रिस्पोंस नही मिल रहा है।

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