सैनिटाइजर निर्यात की अनुमति से मिलों को मिली राहत

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कोरोना वायरस महामारी के बीच बढती मांग को देखकर उत्तर प्रदेश की तरह महाराष्ट्र में भी चीनी मिलर्स ने सैनिटाइजर का काफी बड़ी मात्रा में निर्माण किया और स्थानीय बाजारों में बेचा। बाजार में प्रतिस्पर्धा बढने से मिलों को सैनिटाइजर बेचने में परेशानी हो रही थी। आपूर्ति को बढ़ावा देने और जमाखोरी रोकने के लिए, केंद्र सरकार ने 30 जून, 2020 तक आवश्यक वस्तुओं में फेस मास्क और हैंड सैनिटाइजर को शामिल किया था। लेकिन मिलों का कहना है की सैनिटाइजर मार्केटिंग में सही पकड़ नहीं रख पाए हैं और मुख्य रूप से इसी वजह से मांग बढ़ने पर भी मिलें अपना सैनिटाइजर नही बेच पा रहे है, जिससे अब उनके सामने सैनिटाइजर स्टॉक की नई समस्या निर्माण हुई थी। फ़िलहाल हैंड सैनिटाइजर को अब आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के दायरे से बाहर कर दिया गया है।

सरकार के मुताबिक, डीएफपीडी, राज्य सरकार और चीनी मिलों के ठोस प्रयासों के साथ, हैंड सैनिटाइज़र की स्थापित क्षमता लगभग 5000 लीटर प्रति दिन से बढ़कर 30 लाख लीटर प्रति दिन हो गई है। अब तक 3.70 करोड़ लीटर से अधिक हैंड सैनिटाइजर का उत्पादन किया गया है, जो इसे महामारी के समय में उचित कीमतों पर उपलब्ध हो रहा है। उपलब्धता को देखते हुए, सरकार ने हैंड सैनिटाइज़र के निर्यात की अनुमति दी है।

निर्यात के अनुमति के बाद मिलों को उम्मीद है की अब वे आसानी से निर्यात कर सकेंगे और अधिशेष सैनिटाइजर को कम कर सकेंगे, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ होगा।

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