“मिलों की चीनी जब्त करो और किसानों का पैसा दो”

 

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कोल्हापुर में स्वाभिमानी शेतकरी संघठन द्वारा कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना…

कोल्हापुर : चीनी मंडी 

चीनी मिलों द्वारा गन्ना बिलों का भुगतान नहीं करने के कारण, बच्चों की शिक्षा के लिए भुगतान करने के लिए कोई पैसा नहीं है, बीज और उर्वरक खरीदने के लिए भी किसानों के पास पैसा नहीं है, इसके चलते स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को जिला कलेक्टर अविनाश सुभेदार से अनुरोध किया की, एफआरपी भुगतान में विफल रही मिलों की चीनी को जब्त करो और किसानों को उनका बकाया भुगतान करो।

‘एफआरपी’ कानून के अनुसार किसानों को 14 दिनों में भुगतान करना अनिवार्य है; हालांकि, इस उल्लंघन के कारण, चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड ने  ‘आरआरसी’ कानून के अनुसार, चीनी, गुड़ और मिलों द्वारा उत्पादित अन्य उत्पादों की बिक्री के माध्यम से किसानों को बकाया भुगतान करने के लिए कार्रवाई करने का आदेश दिया  है। तदनुसार, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के कार्यकर्ता इस संबंध में क्या कार्रवाई की गई, यह पूछने के लिए कलेक्टर कार्यालय आए।

इस समय प्रा जालंधर पाटिल ने कहा, चीनी आयुक्त ने उन मिलों पर ‘आरआरसी’ जैसी कार्रवाई करने का आदेश दिया है, जो ‘एफआरपी’ अधिनियम का उल्लंघन करते हैं।इसके अनुसार, जिला कलेक्टर को चीनी जब्ती की कार्रवाई करनी चाहिए और किसानों को पैसा देना चाहिए। कलेक्टर अविनाश सुभादर ने बताया कि,  कानूनी मार्गदर्शन के बाद मिलों पर उचित कार्रवाई की जाएगी। स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को जिला कलक्टर से मुलाकात कर उन कारखानों को चीनी जब्ती नोटिस देने की मांग की, जिन्होंने एफआरपी नहीं दी थी। हालांकि, जिला कलेक्टर और क्षेत्रीय चीनी संयुक्त निदेशक द्वारा कोई फैसला नही होने के बाद, उत्तेजित कार्यकर्ता जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए।

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