शरद पवार चाहते है किसान और चीनी मिलों के बीच स्वीकार्य समाधान…

363

पुणे : चीनी मंडी

पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार ने शुक्रवार को कहा कि, चीनी उद्योग के विकास को लेकर समन्वित तरीके से काम करने के लिए गन्ना किसान और मिलरों के लिए स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने का समय आ गया है। वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआई) द्वारा आयोजित चीनी और संबद्ध उद्योग में स्थिरता – नवाचार और विविधीकरण पर द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पवार उद्घाटन के दौरान भाषण दे रहे थे। वह वीएसआई के अध्यक्ष भी हैं।

पवार ने कहा की, केंद्र सरकार ने कई उद्योंगों में डेरेग्युलेशन के लिए कदम उठाए हैं। हालांकि, चीनी उद्योग अभी भी गन्ना मूल्य निर्धारण, क्षेत्र आरक्षण, निर्यात – आयात और इथेनॉल सम्मिश्रण जैसी सरकारी नीतियों द्वारा शासित है। उन्होंने कहा, गन्ना किसान और उनकी भलाई चीनी उद्योग में सबसे महत्वपूर्ण है, और तो और उपभोक्ता भी उतना ही महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार गन्ने के लिए एफआरपी (उचित और पारिश्रमिक मूल्य) तय करती है जो अनिवार्य है लेकिन चीनी की कीमतों का कोई भरोसा नहीं है, जिसके कारण उत्पादकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए बेहद मुश्किल होता है। पवार ने कहा कि अब उत्पादकों और मिलरों के लिए स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने का समय है।

पवार ने यह भी कहा कि, चीनी की औसत रिकवरी लगभग 10.5 प्रतिशत तक स्थिर है, जबकि इसे 11.5-12% तक सुधारा जा सकता है और इस क्षेत्र में अनुसंधान संगठनों को एक सक्रिय भूमिका निभानी होगी और सरकार को शोधकर्ताओं को उच्च पैदावार के साथ किस्मों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। गन्ने उत्पादकता बढ़ाने के लिए गन्ने की खेती में नवीनतम तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण को सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान संस्थानों, चीनी मिलों और उत्पादकों के बीच मजबूत संबंध की जरूरत है।

यह न्यूज़ सुनने के लिए प्ले बटन को दबाये.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here